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उत्तराखंड में एक Emergency Alert से मचा हड़कंप, बढ़ी लोगों की बेचैनी, जानें क्या है पूरा मामला…

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शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे और फिर दोपहर 2 से 3 बजे के बीच लोगों के मोबाइल पर Emergency Alert भेजे गये

देहरादून। मोबाइल पर अचानक तेजी से बीप की आवाज गूंजने लगी तो हर कोई हैरान रह गया। वाइब्रेशन के साथ आई ये बीप की आवाज एक खास संदेश भी दे रही थी। जिसमें मौसम को लेकर अगले 24 घंटे का अलर्ट दिखाई दे रहा था। खास बात ये है कि ये इमरजेंसी अलर्ट एक साथ तमाम फोन पर आया। जिसके कारण लोगों में कुछ देर के लिए हड़कंप की स्थिति बन गई।

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उत्तराखंड में बदले मौसम के मिजाज के बीच मोबाइल फोन पर अचानक आए Emergency Alert ने लोगों के बीच चर्चा और हल्की दहशत का माहौल पैदा कर दिया। शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे और फिर दोपहर 2 से 3 बजे के बीच एकाएक कई लोगों के मोबाइल फोन तेज आवाज के साथ बजने लगे। खास बात यह रही कि आसपास मौजूद लगभग सभी लोगों के फोन पर एक ही समय में यह अलर्ट आया। जिससे लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ चिंता भी देखने को मिली।

दरअसल यह अलर्ट उत्तराखंड में खराब मौसम की संभावनाओं को लेकर जारी किया गया था। इस Emergency Alert में प्रदेश के कई जिलों में बारिश, बर्फबारी और बिजली कड़कने की आशंका जताई गई। जिन जिलों के लिए चेतावनी जारी की गई, उनमें बागेश्वर, चम्पावत, पिथौरागढ़, देहरादून, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग शामिल हैं. अलर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि अगले 24 घंटे के भीतर इन इलाकों में मौसम खराब हो सकता है और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

पिछले 48 घंटों से राज्य के कई हिस्सों में रुक रुक कर बारिश हो रही है। जिससे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 24 घंटों में भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश जारी रह सकती है। इसके साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

हालांकि मोबाइल पर आए इस Emergency Alert से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह एक अत्याधुनिक तकनीक के तहत भेजा जाने वाला चेतावनी संदेश होता है, जिसे Cell Broadcasting System के जरिए प्रसारित किया जाता है। यह प्रणाली 4G और 5G नेटवर्क के माध्यम से सीधे लोगों के मोबाइल फोन तक पहुंचती है। इसकी खासियत यह है कि यह सामान्य मैसेज की तरह नहीं आता, बल्कि तेज बीप और वाइब्रेशन के साथ फोन पर दिखाई देता है, ताकि लोगों का ध्यान तुरंत इस पर जाए।

राज्य में मौसम के बिगड़े हालात को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन की ओर से कोशिश की जा रही है कि किसी भी संभावित आपदा से पहले लोगों तक समय रहते जानकारी पहुंचाई जा सके। यही कारण है कि Emergency Alert जैसे सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को एक साथ चेतावनी दी जा सके।

यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में इस तरह का अलर्ट जारी किया गया हो। इससे पहले भी कई बार टेस्टिंग के तौर पर मोबाइल फोन पर Emergency Alert भेजे जा चुके हैं। हालांकि, कई बार अचानक तेज आवाज के साथ फोन बजने से लोग घबरा जाते हैं। पैनिक की स्थिति बन जाती है। लेकिन हकीकत में यह सिस्टम लोगों की सुरक्षा के लिए ही बनाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अलर्ट को लेकर किसी भी तरह के डर या अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। यह केवल एक चेतावनी प्रणाली है। जिसका उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे से पहले सतर्क करना है। ऐसे में जब भी इस तरह का अलर्ट आए, तो उसे गंभीरता से लेते हुए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है।

उत्तराखंड में बदले मौसम के बीच जारी किया गया Emergency Alert एक अहम सुरक्षा कदम है। य़ह Emergency Alert समय रहते लोगों को सचेत करने में मदद करता है। ऐसे अलर्ट को समझदारी से लेना और अफवाहों से बचना ही सबसे बेहतर तरीका है।

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से राज्य में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में आज उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून द्वारा एक परीक्षण अलर्ट (Testing Alert) जारी किया गया। इस परीक्षण का उद्देश्य राज्य में स्थापित आपातकालीन सूचना प्रसारण प्रणाली की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करना तथा यह सुनिश्चित करना था कि आपदा की स्थिति में सूचना समयबद्ध और व्यापक रूप से प्रसारित हो सके।

इस प्रणाली को और अधिक उन्नत एवं विश्वसनीय बनाने के लिए नियमित परीक्षण किए जा रहे हैं, जो कि आगामी एक सप्ताह तक जारी रहेंगे। इन परीक्षणों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किस मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाता (Telecom Service Provider TSP) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में अलर्ट संदेशों का प्रसारण प्रभावी ढंग से हो रहा है या नहीं हो पा रहा है। साथ ही, किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। इसके साथ ही यह भी परीक्षण किया जा रहा है कि विभिन्न परिस्थितियों में अलर्ट संदेश कितनी शीघ्रता से और कितनी सटीकता के साथ आमजन तक पहुंच रहे हैं।

इस समग्र प्रक्रिया का उद्देश्य भविष्य में किसी भी आपदा की सम्भावना होने पर राज्य के नागरिकों को समय रहते सचेत किया जाना है, ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर सावधानियां बरत सकें। इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली के माध्यम से आपातकालीन स्थितियों में प्रशासन और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से अपेक्षा की है कि वे ऐसे परीक्षण अलर्ट को गंभीरता से लें, घबराएं नहीं, और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। यह संयुक्त प्रयास ही राज्य को आपदाओं के प्रभाव से सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध होगा।

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