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चम्पावत : विस सत्र के समय को बढ़ाने की मांग को लेकर कांग्रेस ने सीएम को ज्ञापन भेजा

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चम्पावत। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज शुक्रवार को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। जिसमें उन्होंने विधानसभा सत्र को बढ़ाए जाने की मांग की है। कहा गया है कि उत्तराखंड में बहुत कम समय के लिए विधानसभा सत्र आहूत किए जाते हैं। जिससे राज्य की जनता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न राज्य के सर्वोच्च सदन में पूर्ण रूप से नहीं आ पाते हैं।

जिलाध्यक्ष चिराग फर्त्याल के नेतृत्व में एडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि शीघ्र ही उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आयोजित होना है। देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं की तुलना में उत्तराखंड की समस्याएं सामने नहीं आ पाती हैं। प्रदेश के 70 विधायक गणों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित प्रश्नों को प्रस्तुत कर सरकार का जबाव भी लेना होता है। राज्य में हाल ही में कानून व्यवस्था की स्थिति अपने न्यूनतम स्तर पर है। इस साल वन्य जीवों के आक्रमण से हर हिस्से में मानवीय क्षति हुई है। हर घर नल योजना के बाबजूद राज्य का हर हिस्सा पीने के पानी की समस्या से परेशान है। पिछले साल राज्य के विभित्र स्थानों में आपदाएं आई हैं। अभी तक आपदा पीड़ितों के पुर्नवास और मुआवजे की समस्याएं खड़ी हैं। सरकार ने राज्य की सरकारी जमीनों की नीलामी के रास्ते खोल दिए हैं।

उन्होंने कहा कि आपके अधीन अधिकांश विभाग हैं यह सभी महत्वपूर्ण विभाग हैं । आपके रहते हुए पिछली विधानसभा चतुर्थ विधानसभा) और अभी तक आहूत इस विधानसभा (पंचम विधानसभा) के किसी भी सत्र में प्रश्नकाल नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाते देखा कि विधानसभा में जनता के अधिकारों और समस्याओं पर उठे सवालों का उत्तर देने में धाकड़ धामी असहज हैं। जबकि उनके स्वयं के पास लगभग 40 विभाग है। उन्होंने आगामी बजट सत्र के संबंध में निम्र निवेदन किया कि प्रस्तावित बजट सत्र में सोमवार का दिन जिसमें प्रश्न काल और अन्य विधाई कार्य हों। बजट सत्र इस तरह आहूत किया जाय कि कम से कम 3 सोमवार मुख्यमंत्री अपने द्वारा धारित विभागों से संबंधित प्रश्नों को उत्तर प्रश्न काल में दें।

ज्ञापन में आरोप लगाया है कि सरकार बार-बार विधाई कार्यों की कमी का रोना रोती है। जबकि राज्य में अभी भी कई कानून उत्तर प्रदेश के चल रहे हैं, राज्य में कई नियमावलियां भी उत्तर प्रदेश राज्य की चल रही है। इन कानूनों को उत्तराखण्ड के अनुसार बदला जाना आवश्यक है। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने राज्य के पंचायती राज एक्ट पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि आपके पास सही कानून बनाने के लिए अधिकारी या विशेषज्ञ नहीं है तो हम आपको प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी उपलब्ध कराते हैं।
कहा है कि राज्य में भ्रष्टाचार, महिलाओं पर उत्पीड़न, बड़ते हुए अपराध, वन्य जीवों के कारण मानव हानि सरकारी जमीनों की बहेतों को बंदरबांट आदि दर्जनों ज्वलंत और तत्कालिक महत्व के मुद्दे हैं। इन सभी पर विधानसभा में चर्चा होनी आवश्यक है। इन सभी प्रश्नों के उत्तर के लिए राज्य विधनसभा का बजट सत्र कम से कम 3 सप्ताह की समयावधि के लिए आहूत किया जाना चाहिए। ज्ञापन देने वालों में मनीष महर, नाथ सिंह, प्रमोद बडेला, अंशु अधिकारी, दीप रैंसवाल, उमेश शर्मा, संजय कुमार आदि शामिल रहे।