चम्पावत : अमोड़ी में अतिक्रमण को लेकर दरोगा के बिगड़े बोल, ग्रामीण से बोले अभी बना दूंगा कबूतर
ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारी को हटाने की उठाई मांग
चम्पावत। जिला प्रशासन की ओर से रविवार को चम्पावत टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अमोड़ी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान वहां पर मौजूद ग्रामीणों ने अतिक्रमण को लेकर विरोध जताया। इस दौरान वहां तैनात एक दरोगा ग्रामीण से बात करते हुए नजर आ रहे हैं और वह कह रहे हैं कि यहां से हट जा वरना तेरे को कबूतर बना दूंगा। क्या मित्र पुलिस का यह रवैया सराहनीय है। वहां मौजूद एक व्यापारी ने इसका वीडियो बना दिया। जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
दरोगा के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तरह तरह की टिप्पणी भी कर रहे हैं। एक तरफ जनपद में लोग पुलिस को मित्र पुलिस के नाम से सहयोग की अपेक्षा करते हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस के इस अमानवीय व्यवहार से लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अतिक्रमण के दौरान एक ग्रामीण आपत्ति करता है तो वहां पर पुलिस में तैनात एक दरोगा पहुंच जाते हैं और कहते हैं कि यहां से हट जा वरना तेरे को कबूतर बना दूंगा। ग्रामीण अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वर्दी पहनी है तो किसी को भी कबूतर बना दिया जाएगा या उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। पुलिस का यह व्यवहार मित्र पुलिस को शोभा नहीं देता है। एक तरफ उत्तराखंड में पुलिस अपने आप को मित्र पुलिस होने का दावा करती है वहीं दूसरी तरफ पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी वर्दी की ताकत का गरीब जनता को कैसे परेशान करते हैं, इसका सीधा उदाहरण वायरल वीडियो में मिल जाएगा। बीते दिनों पिथौरागढ़ के एसपी रहे आइपीएस लोकेश्वर सिंह के ऊपर भी इसी तरह के आरोप सिद्ध हुए हैं। जिसको लेकर जांच चल रही है। रविवार को दरोगा की इस व्यवहार से क्षेत्र के लोगों में काफी आक्रोश है और लोग पुलिस की काफी निंदा कर रहे हैं। साथी दरोगा को उक्त क्षेत्र से तत्काल हटाने की मांग कर रहे हैं।
वहीं इस मामले को लेकर चल्थी चौकी इंचार्ज राकेश कठायत का कहना है कि ग्रामीण विनोद भट्ट का अतिक्रमण को लेकर कोई मसला नहीं था। वह अक्सर शराब पीकर अपने परिजनों से लड़ाई झगड़ा करता रहता है। कई बार उसके परिवार वालों ने रात में पुलिस को फोन कर उसकी द्वारा मारपीट किए जाने की शिकायत की थी। पुलिस उसे समझाने बुझाने के लिए तलाश कर रही थी, लेकिन वह मिलता नहीं था। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के बाद वह उन्हें दिखाई दिया था। विनोद भट्ट शराब के नशे में था। उसके परिजनों की ओर से मिल रही मौखिक शिकायत को लेकर उन्होंने उसे डांठ लगाई थी।

