उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी के लिए देवताओं की विशेष पूजा, अब साधना करेंगे ग्रामीण!
उत्तराखंड में जनवरी का महीना आधा गुजर गया है, लेकिन बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। दिसंबर का महीना पहले ही सूखा गुजर गया था। अब जनवरी भी विदाई पर है। बावजूद इसके बारिश की छींट तक नहीं गिरी है। ऐसे में भीषण सूखे को देखते हुए चमोली जिले के दूरस्थ और नंदा देवी राजजात यात्रा के मुख्य पड़ाव वाण गांव में ग्रामीणों ने ऊचियाणा (विशेष पूजा) किया। जिसमें लाटू देवता और मां नंदा देवी से बारिश-बर्फबारी के लिए सामूहिक मन्नत मांगी गई।

ग्रामीणों ने लाटू देवता और मां नंदा देवी से प्रार्थना की कि ‘देवभूमि के आराध्य देवता हमारा समूचा उत्तराखंड बर्फबारी और बारिश के लिए तरस रहा है। प्रभु एक हफ्ते के भीतर बारिश का आशीर्वाद प्रदान करें।’ इस अवसर पर ये भी सर्वसम्मत निर्णय लिया गया कि यदि एक हफ्ते के भीतर बारिश नहीं होती तो ग्रामीण लाटू देवता मंदिर वाण की शरण में जाकर ध्यान-साधना में लीन होंगे और बारिश होने तक वहीं ध्यान करेंगे।
बता दें कि उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी ना होने से किसान परेशान हैं। बारिश और बर्फबारी ना होने से शीतलहर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वहीं, किसानों को भी इसका नुकसान हो रहा है। फसलों पर सीधा असर पड़ रहा है। खासकर रबी की फसल चौपट होने की कगार पर है, लेकिन बारिश और बर्फबारी नहीं हो रही है। जिससे खेती किसानी से आजीविका चलाने वाले लोगों के सामने गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। जब भी बादल छाते हैं, उनकी नजरें आसमान की तरफ चली जाती है।

बीते सालों में जहां दिसंबर-जनवरी महीने में बारिश और बर्फबारी होने से पहाड़ी क्षेत्र की रौनक बढ़ जाती थी। चमोली के अलग-अलग स्थान के पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार होते थे, लेकिन इस बार बारिश और बर्फबारी न होने से पहाड़ काले नजर आ रहे हैं। हर तरफ धूल उड़ रही है। खेतों से नमी गायब हो चुकी है। ग्रामीणों की चिंता है कि अगर समय रहते बारिश और बर्फबारी नहीं हुई तो आगामी गर्मियों के सीजन में हाहाकार मच सकता है।
उन्हें डर है कि कहीं जलस्त्रोत न सूख जाएं. क्योंकि, अभी से ही जलस्तर कम हो गया है। हिमालय में बर्फ नजर नहीं आ रही है। अगर मौसम ऐसा ही रुखा रहा तो ग्लेशियर पर खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में चमोली जिले के वाण गांव में स्थानीय लोगों ने पूजा पाठ कर भगवान से बारिश और बर्फबारी की मिन्नतें मांगी है। आस्था पर अटूट विश्वास देवभूमि के लोगों का रहता है। उन्होंने पूजा पाठ कर भगवान से बारिश और बर्फबारी की कामना की है।


