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उत्तराखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज! सक्रिय हो रहा है पश्चिमी विक्षोभ, जानें कब होगी बारिश और बर्फबारी

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देहरादून। उत्तराखंड में लंबे समय से शुष्क बने मौसम को लेकर अब लोगों की निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं। खासतौर पर किसान, बागवान और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर बारिश और बर्फबारी का इंतजार कब खत्म होगा। मौजूदा हालात में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ठंड तो बनी हुई है, लेकिन बारिश और बर्फबारी नहीं होने से खेती और जल स्रोतों को लेकर चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं।

मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल उत्तराखंड में मौसम पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में बदलाव की संभावनाएं बनने लगी हैं। यह बदलाव न सिर्फ तापमान में गिरावट लाएगा, बल्कि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश की उम्मीद भी जगा रहा है। इस समय उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क बना हुआ है। दिन के समय धूप निकलने से हल्की गर्माहट महसूस हो रही है, लेकिन सुबह और शाम के वक्त ठंड का असर साफ नजर आ रहा है।

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मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो आने वाले दो से तीन दिनों के भीतर उत्तराखंड के मौसम में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से सबसे पहले ऊंचाई वाले इलाकों में बादल छाने शुरू होंगे। इसके बाद धीरे-धीरे मौसम के सक्रिय होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बर्फबारी हो सकती है। वहीं मैदानी और मध्य पर्वतीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार बन रहे हैं। हालांकि शुरुआत में यह बारिश छिटपुट हो सकती है, लेकिन इससे मौसम में ठंड बढ़ने की संभावना है। मसलन 20 जनवरी के आसपास प्रदेश में मौसम बारिश और बर्फ़बारी लेकर आएगा।

उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश नहीं होने का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। रबी फसलों को इस समय नमी की सख्त जरूरत है। गेहूं, सरसों और दालों की फसल के लिए बारिश अमृत समान मानी जाती है। इसके अलावा बागवानी करने वाले किसानों के लिए भी यह मौसम बेहद अहम है। सेब, आड़ू, खुबानी और अन्य फलों के लिए ठंड के साथ-साथ बर्फबारी भी जरूरी मानी जाती है।

बर्फबारी से न सिर्फ मिट्टी में नमी बढ़ती है, बल्कि कीट रोग भी नियंत्रित होते हैं, जिससे अगली फसल बेहतर होती है. किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होती है तो इसका सीधा फायदा कृषि और बागवानी दोनों को मिलेगा.

जल स्रोतों और नदियों के लिए भी अहम: उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश सिर्फ खेती के लिए ही नहीं बल्कि जल स्रोतों के लिए भी बेहद जरूरी है. पहाड़ों में होने वाली बर्फबारी धीरे-धीरे पिघलकर नदियों और गाड़ गधेरों को पानी देती है. इससे गर्मियों में पानी की किल्लत से राहत मिलती है.

अगर इस सीजन में बर्फबारी नहीं होती है, तो आने वाले महीनों में जल संकट की स्थिति बन सकती है. यही वजह है कि मौसम में बदलाव को लेकर न सिर्फ किसान, बल्कि आम लोग भी उम्मीद लगाए बैठे हैं.

क्या बढ़ेगी ठंड?: मौसम विभाग के वैज्ञानिक रोहित थपलियाल का कहना है कि बारिश और बर्फबारी शुरू होते ही प्रदेश में ठंड और बढ़ सकती है. खासतौर पर रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है. ऊंचाई वाले इलाकों में शीतलहर जैसे हालात भी बन सकते हैं. लेकिन ये ठंड नुकसानदायक नहीं होगी. कुल मिलाकर उत्तराखंड में मौसम फिलहाल शांत है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसके बदलने की पूरी संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश और बर्फबारी की उम्मीद की जा रही है, जिससे न सिर्फ ठंड बढ़ेगी, बल्कि किसानों, बागवानों और जल स्रोतों को भी बड़ा फायदा मिल सकता है.

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