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देहरादून : नदी में डूब रहे साथी को बचाने के दौरान शहीद हुए कैप्टन प्रशांत चौरसिया

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देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुए एक सैन्य अभ्यास के दौरान एक साहसिक और भावुक कर देने वाला वाक्या सामने आया, जहां एक युवा कैप्टन ने अपने साथी की जान बचाने के लिए खुद को न्यौछावर कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भैरव बटालियन की घातक प्लाटून प्रतियोगिता के दौरान देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में आसन नदी पार करने का अभ्यास चल रहा था। इसी दौरान कुछ जवान तेज बहाव में फंसकर डूबने लगे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कैप्टन प्रशांत चौरसिया बिना एक पल गंवाए पानी में कूद पड़े। कैप्टन प्रशांत ने डूब रहे जवान को बचा लिया, लेकिन इसी दौरान वह खुद पानी के अंदर पत्थर से टकरा गए। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें तुरंत मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन अंततः वह जिंदगी की जंग हार गए।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 24 वर्षीय कैप्टन प्रशांत चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां कस्बे के रहने वाले थे। घर में वह मंझले बेटे थे। बड़ी बहन की हाल ही में शादी हुई थी और छोटा भाई अभी भविष्य की तैयारी में जुटा है। वर्तमान में वह भारतीय सेना की भैरव बटालियन में देहरादून में तैनात थे। जैसे ही उनके शहीद होने की खबर घर पहुंची, मां सुमन देवी बेसुध हो गईं। पिता पुरुषोत्तम चौरसिया की आंखों में दर्द साफ झलक रहा था। घर का माहौल शोक में डूब गया।

कैप्टन का पार्थिव शरीर बीते सोमवार को देहरादून से वायुसेना के विशेष विमान से वाराणसी लाया गया, जहां सैन्य अधिकारियों ने उन्हें सलामी दी। इसके बाद जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी। गांव की गलियों में जब तिरंगे में लिपटा बेटा पहुंचा, तो लोगों ने फूल बरसाकर उसे अंतिम विदाई दी। हर ओर सिर्फ एक ही आवाज गूंजायमान थी ‘शहीद प्रशांत अमर रहे’।
शाम को पक्का बलुआ घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने शहीद की चिता को मुखाग्नि दी, जबकि प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

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