चम्पावत : हाईकोर्ट ने लड़की के बयान के आधार पर POCSO मामले की कार्यवाही को किया रद्द
चम्पावत/नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राजकीय महाविद्यालय चम्पावत के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष, पूर्व बीडीसी सदस्य व भाजपा तल्लादेश के पूर्व मंडल अध्यक्ष कमल रावत पर दुष्कर्म और POCSO अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले की कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि मामला आपसी सहमति और निजी विवाद के समाधान पर आधारित है। न्यायालय ने माना कि ऐसी स्थिति में कानूनी कार्यवाही जारी रखना केवल अदालत के समय की बर्बादी होगी।
यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज की गई एक FIR (सं. 76/2023) से जुड़ा है, जो चम्पावत के विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में लंबित था। कमल रावत पर एक नाबालिग लड़की ने IPC की गंभीर धाराओं और POCSO एक्ट के तहत आरोप लगाए थे। जिस पर कोतवाली चम्पावत पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।
कार्यवाही के दौरान पीड़िता ने धारा 164 Cr.P.C. के तहत दर्ज अपने बयान में कहा कि वह आरोपी को पसंद करती थी और उससे शादी करना चाहती थी। उसने यह भी स्वीकार किया कि ग्रामीणों के दबाव और अपनी मां की असहमति के कारण उसने यह FIR दर्ज कराई थी। वर्तमान में पीड़िता बालिग हो चुकी है और उसने अदालत को बताया कि वह अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। न्यायमूर्ति आलोक महरा ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों (जैसे ‘ज्ञान सिंह बनाम पंजाब राज्य’) का हवाला देते हुए कहा कि यदि विवाद व्यक्तिगत प्रकृति का है और पक्षकारों ने समझौता कर लिया है, तो उच्च न्यायालय अपनी अंतर्निहित शक्तियों (Section 482 Cr.P.C.) का उपयोग कर कार्यवाही रद्द कर सकता है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ चल रही पूरी कार्यवाही और चार्जशीट को निरस्त करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि विशेष सत्र न्यायाधीश, चम्पावत की अदालत में लंबित स्पेशल सेशंस ट्रायल नंबर 08 ऑफ 2024 की पूरी कार्यवाही के साथ-साथ चार्ज-शीट, जो F.I.R. No. 76 of 2023 से उत्पन्न है और I.P.C. की धारा 354, 363, 376, 506 तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 की धारा 5/6 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए पंजीकृत है, एतद्द्वारा रद्द (quashed) की जाती है।
हाईकोर्ट से कार्यवाही रद्द होने के बाद कमल रावत ने उच्च न्यायालय का आभार जताते हुए कहा कि यह सत्य की है। कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं यह बात सच साबित हुई। कहा कि उन्हें राजनीतिक षययंत्र के तहत फंसाया गया था। भाजपा नेताओं ने एक नाबालिग को हथियार बना कर उनकी राजनैतिक हत्या करने की साजिश रची थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। उनकी करनी की सजा अब भगवान उन्हें स्वयं देंगे।

