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उत्तराखंड : पहाड़ की डोबरी गुफा में मिला तांबे का भंडार

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देवभूमि उत्तराखंड अथाह प्राकृतिक संपदाओं का भंडार है। इसी से जुड़ी एक बड़ी खबर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से सामने आ रही है। ‌जहां खिर्सू ब्लॉक स्थित डोबरी गांव में तांबे की मौजूदगी के ठोस संकेत सामने आए हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञान विभाग की टीम को यहां एक गुफा की चट्टानों में तांबा सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिज तत्वों के प्रमाण मिले हैं। यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है, बल्कि क्षेत्र के संभावित आर्थिक और सामाजिक भविष्य की दिशा भी तय कर सकती है।

आपको बता दें कि गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भू-गर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. एमपीएस बिष्ट ने शोध छात्रा पल्लवी जोशी और उनके गाइड सोबत सिंह के साथ गुफा के भीतर और बाहर विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान चट्टानों में तांबे की उपस्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज की गई। टीम ने चट्टानों के नमूने एकत्र कर लिए हैं, जिन्हें अब विस्तृत प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके साथ ही, आगामी चरण में उपग्रह तकनीक के जरिए भी इस पूरे क्षेत्र का अध्ययन करने की तैयारी की जा रही है, ताकि खनिजों की वास्तविक उपलब्धता और विस्तार का सटीक आकलन हो सके।

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इस संबंध में डॉ. बिष्ट के अनुसार, प्रारंभिक सर्वे में इस क्षेत्र में कापर पाइराइट, मैलाकाइट और कैल्साइट जैसे खनिज तत्वों की मौजूदगी सामने आई है। स्थानीय बुजुर्गों की मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों से भी इस खोज को बल मिलता है। माना जाता है कि नौवीं से पंद्रहवीं सदी के राजशाही काल और इसके बाद गोरखा शासन के दौरान भी इस गुफा से तांबे का खनन किया जाता रहा है।

वर्ष 1739 में बैरेट के लेखों में भी है 5 किमी लंबी इस गुफा और खनन गतिविधियों का उल्लेख है। यह गुफा डोबरी गांव से करीब दो किलोमीटर ऊपर, घने जंगलों के बीच स्थित है। बताया जाता है कि यह गुफा लगभग पांच किलोमीटर लंबी है, जिसका एक सिरा डोबरी गांव और दूसरा पोखरी गांव की ओर खुलता है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और हिंसक वन्य जीवों की मौजूदगी के कारण यहां तक पहुंचना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विश्वविद्यालय की भू-गर्भ विज्ञान टीम ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही डोबरी क्षेत्र में संभावित तांबे की खान को लेकर गहन अध्ययन शुरू किया जाएगा। इस अध्ययन में खनिज की मात्रा, व्यावसायिक खनन की संभावना, पर्यावरण और स्थानीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव, रोजगार के अवसर, खनिज के शोधन और आपूर्ति व्यवस्था जैसे कई अहम पहलुओं को शामिल किया जाएगा। यदि आगे की जांच में यह क्षेत्र खनन के लिए उपयुक्त पाया जाता है, तो यह खोज पौड़ी जिले के लिए आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की नई राह खोल सकती है।