देहरादून की बेटी डॉ. शिवानी को मिली यूरोप की प्रतिष्ठित मैरी क्यूरी फेलोशिप, 1.25 करोड़ का मिलेगा रिसर्च ग्रांट
देहरादून। युवा वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। यूरोपियन कमीशन ने उन्हें दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मानी जाने वाली ‘मैरी स्क्लोडोव्स्का-क्यूरी फेलोशिप’ (MSCA) से सम्मानित किया है। इस फेलोशिप के लिए दुनिया भर से आए 17 हजार आवेदनों में से मात्र 9.6% शोधकर्ताओं का चयन हुआ है, जिनमें डॉ. शिवानी ने अपनी जगह बनाई है।

मैरी क्यूरी फेलोशिप के लिए चयन होना किसी भी वैज्ञानिक के लिए सपने जैसा होता है। इसकी चयन प्रक्रिया महीनों चलती है, जिसमें शोध की गुणवत्ता और उसके भविष्य में होने वाले वैश्विक असर को परखा जाता है। डॉ. शिवानी की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय शोधकर्ता वैश्विक मंच पर किसी से कम नहीं हैं। फिलहाल वह मई 2025 से फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ युवास्क्यूला में एडवांस रिसर्च कर रही हैं।
इस फेलोशिप के तहत डॉ. शिवानी को अगले दो वर्षों में लगभग 1,10,000 से 1,40,000 यूरो (भारतीय मुद्रा में करीब 1.10 करोड़ से 1.25 करोड़ रुपये से अधिक) का अनुदान मिलेगा। इसमें रहने-खाने के भत्ते के साथ-साथ रिसर्च ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शामिल होने का खर्च भी शामिल है। यह फेलोशिप न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि भविष्य में बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में काम करने के दरवाजे भी खोलती है।
डॉ. शिवानी का शैक्षणिक सफर बेहद शानदार रहा है। देहरादून में जन्मी शिवानी ने आईआईटी मंडी से एमएससी करने के बाद गेट (GATE) परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनके पति, जो मूल रूप से कानपुर के निवासी और जर्मन भाषा के विशेषज्ञ हैं, वर्तमान में कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

