धामी सरकार ने फिर खोला दायित्वों का पिटारा, पार्टी के कई नेताओं को दिया दर्जामंत्री का तोहफा
देहरादून। उत्तराखंड में धामी सरकार ने एक बार फिर पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए दायित्वों का पिटारा खोल दिया है और विभिन्न दायित्वों पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। खास बात ये है कि इसके लिए काफी समय से पार्टी कार्यकर्ता इंतजार कर रहे थे। आखिरकार कई पार्टी कार्यकर्ताओं को अप्रैल महीने की शुरुआत में दायित्वों का तोहफा मिल गया है।
उत्तराखंड में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद अब सरकार और संगठन स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दायित्व देने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न बोर्ड, परिषदों और समितियों में पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कर दी हैं। इसके तहत कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग-अलग संस्थाओं में उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे पदों पर नामित किया गया है।
दरअसल, राज्य में कैबिनेट विस्तार के बाद से ही ये चर्चा तेज थी कि सरकार जल्द ही पार्टी के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी समायोजित करेगी, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इसी को देखते हुए अलग-अलग परिषदों और सलाहकार समितियों में नई नियुक्तियों की सूची जारी की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पार्टी संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि सरकार बनने या कैबिनेट विस्तार के बाद संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को बोर्ड, निगम और परिषदों में दायित्व देकर उन्हें भी जिम्मेदारी दी जाती है। इसी कड़ी में अब उत्तराखंड में भी कई नियुक्तियां की गई हैं।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इन नियुक्तियों को पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले नेताओं को इस तरह के दायित्व दिए जाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और उन्हें सरकार के साथ काम करने का अवसर भी मिलता है।
दरअसल, कैबिनेट विस्तार के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार जल्द ही विभिन्न बोर्ड, निगम और परिषदों में नियुक्तियों की नई सूची जारी कर सकती है। इसी कारण कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता भी अपने नाम इस सूची में शामिल होने की उम्मीद लगाए हुए थे।
अब जब सरकार ने विभिन्न परिषदों और समितियों में कई नियुक्तियां कर दी हैं तो इसे उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी कई बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां की जा सकती हैं, जिससे संगठन के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी मिल सकती है।

