चम्पावत : डीएम के निर्देश पर नाराज हुए चिकित्सक, ओपीडी का किया बहिष्कार , तीन घंटे परेशान रहे मरीज
चम्पावत। जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डीएम मनीष कुमार ने बाहर से दवाएं न लिखने के निर्देश क्या दिए, इससे चिकित्सक नाराज हो गए। नाराज चिकित्सकों ने आज गुरुवार को ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। जो करीब तीन घंटे चला। जिससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। समझाने बुझाने के बाद चिकित्सक करीब तीन घंटे बाद काम पर लौटे।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बुधवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों के लिए बाहर से दवाएं नहीं लिखने निर्देश दिए थे। जिस पर प्रभारी पीएमएस डॉ. प्रदीप बिष्ट ने सभी डॉक्टरों बाहर से दवाएं नहीं लिखने के निर्देश जारी कर दिए। इससे नाराज चिकित्सकों ने गुरुवार को सभी दवाओं की उपलब्धता के बाद ही काम करने की बात कही और तीन घंटे तक ओपीडी में नहीं पहुंचे। उनका कहना था कि जिला अस्पताल में सभी दवाओं की उपलब्धता के बाद ही काम करेंगे। जिससे करीब तीन घंटे तक ओपीडी का कार्य प्रभावित रहा। इस दौरान अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे को छोड़ कर ओपीडी से संबंधित अधिकांश सेवाओं पर असर पड़ा। बाद में डॉक्टर्स को समझाने और डीएम के निर्देश के बाद ओपीडी का कार्य बहिष्कार वापस लिया गया। कार्यबहिष्कार के चलते मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ा। बाद में ओपीडी सुचारू होने से मरीजों को राहत मिली।



प्रभारी पीएमएस डॉ. बिष्ट ने बताया कि कतिपय मिसअंडरस्टैंडिंग के चलते कुछ डॉक्टर्स नाराज थे। डॉक्टर्स का कहना था कि जिम्मेदारी से काम करने के बावजूद उन पर उठ रही अंगुली उठ रही है। ऐसे में सभी दवाओं के आने पर ही वे काम करेंगे। डॉक्टर्स को समझाने और डीएम के निर्देश के बाद कार्य बहिष्कार वापस ले लिया गया। जिन दवाओं की उपलब्धता नहीं है, अति आवश्यकीय होने पर दवाओं को जेनरिक नाम के साथ बाहर से लिखा जा सकता है। इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। इसी के साथ ओपीडी सुचारू हो गई है। लोकल लेवल पर खरीद के लिए जिलाधिकारी ने 5 लाख रुपये दिए हैं। पानी और अन्य व्यवस्थाओं को भी ठीक करने के लिए जिलाधिकारी ने पहल की है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा है कि गरीब मरीजों को दवाओं और अन्य चिकित्सकीय जरूरतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला अस्पताल को 5 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। जरूरत होने पर चिकित्सा प्रबंधन समिति के कोष का उपयोग किया जाएगा। अस्पताल में सर्वोत्तम इलाज मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल की पानी की व्यवस्था को ठीक कराया जा रहा है।

