पौड़ी गढ़वाल के अस्पताल में जमीन पर लिटाकर किया गया घायल का उपचार
उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार भले ही लाख दावे क्यों न कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर दिखाई पड़ती है। अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को ना तो सही समय पर उपचार मिलता है और ना ही उनके साथ मानवीय व्यवहार किया जाता है। ऐसी ही कुछ खबर पौड़ी जिले से सामने आ रही है, जहां पर एक घायल व्यक्ति को अस्पताल में बेड की जगह जमीन पर लेटा दिया गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक के पिपली गांव के निवासी 42 वर्षीय अर्जुन भंडारी बीते गुरुवार को अपने गांव जा रहे थे। इस दौरान वह रास्ते में गिर गए। उनको रास्ते में गिरा देख कुछ लोगों ने इसकी जानकारी एंबुलेंस 108 को दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची एंबुलेंस की टीम से घायल को एकेश्वर ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी पाटी सैंण पहुंचाया। जहां पर घायल को उपचार देने के बजाय उसे स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही स्ट्रेचर पर जमीन में रख दिया गया। जैसे ही इसकी जानकारी गांव के ही एक व्यक्ति को मिली तो उन्होंने अपने फोन से पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस दौरान वह डॉक्टर से सवाल जवाब करते हुए भी नजर आए।

ग्रामीणों की मांग है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को दोबारा से दोहराया ना जाए, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में ले। वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ पौड़ी डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने बताया है कि पीएचसी में जो मरीज ले जाया गया था वो नशे की हालत में था। 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों ने मरीज को बेड पर रखने के बजाय जमीन पर छोड़ दिया।
पीएचसी पाटी सैंण में वर्तमान में वार्ड ब्वाय की तैनाती नहीं है, जहां पर केवल महिला कर्मचारी मौजूद थीं। जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि कुछ समय बाद हालात सामान्य हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाकर इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया है।
अस्पताल प्रशासन ने वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए कहा कि स्ट्रेचर का आकार बेड से बड़ा था, इसलिए मरीज को स्ट्रेचर सहित जमीन में रखा गया। क्योंकि वह काफी दर्द में था। डॉक्टरों को अंदेशा था कि उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई है। जिसके कारण उन्हें काफी तकलीफ हो रही है। यदि वह मरीज को स्ट्रेचर से हटाकर बेड में शिफ्ट करते तो उनकी दिक्कत बढ़ सकती थी। इसलिए उन्होंने स्ट्रेचर समेत मरीज को जमीन पर रखकर वहीं उपचार शुरू किया। प्राथमिक उपचार के बाद कूल्हे की हड्डी टूटने की आशंका के चलते मरीज को जिला अस्पताल रेफर किया गया। हैरानी की बात तो यह है कि यह सब नजारा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के गृह जनपद पौड़ी में देखने को मिल रहा है, जहां पर मरीज के लिए एक बेड तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

