लोहाघाट में सम्पन्न हुआ 48 दिवसीय ऐंपण शिल्पकला प्रशिक्षण कार्यक्रम, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
लोहाघाट/चम्पावत। अनुसूचित जाति उप-योजना (SCP) के अन्तर्गत महिलाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के उद्देश्य से 48 दिवसीय ऐंपण शिल्पकला प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन कल लोहाघाट में किया गया। इस प्रशिक्षण से 25 महिलाओं ने लाभ प्राप्त किया। समापन अवसर पर उपाध्यक्ष वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति श्याम नारायण पांडेय तथा नगर पालिकाध्यक्ष गोविन्द वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने प्रशिक्षुओं के कार्यों का अवलोकन किया।

प्रशिक्षणार्थी महिलाओं द्वारा प्रदर्शित परम्परागत ऐंपण शिल्पकला उत्पादों की अतिथियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने न केवल परम्परागत कला को जीवंत किया है बल्कि इसे आधुनिकता से जोड़कर आजीविका का साधन भी बना सकती हैं। महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र पंकज तिवारी ने बताया कि यह प्रशिक्षण उत्तराखंड हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास परिषद द्वारा प्रायोजित है। कार्यक्रम का उद्देश्य परम्परागत कुमाऊंनी शिल्प को प्रोत्साहन देना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है। इसके साथ ही परम्परागत ऐंपण कला को आधुनिक कला से जोड़ने और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण न केवल कला के संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं बल्कि महिलाओं के सामाजिक आर्थिक सशक्तिकरण में भी सहायक सिद्ध होंगे। राज्य के विभिन्न जिलों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। मास्टर क्राफ्टमेन अपर्णा पनेरू ने ऐंपण शिल्प की बारीकियों और इसकी वर्तमान बाजार मांग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को बताया कि हस्तनिर्मित और पारम्परिक कलाओं की आज के समय में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को समझाया कि अगर वे अपनी कला को स्वरोजगार के रूप में अपनाएँ तो यह न केवल उन्हें आर्थिक मजबूती देगा बल्कि स्थानीय परम्परा को भी नई पहचान मिलेगी।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत उपयोगी और लाभप्रद सिद्ध हुआ है। इस दौरान उनकी कला में निखार आया है, दक्षता में वृद्धि हुई है और अब वे आत्मविश्वास के साथ इस शिल्प को स्वरोजगार का माध्यम बनाएंगी। समापन अवसर पर प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राजीव पाठक ने किया। इस अवसर पर विकास नेगी, मनमोहन बोरा, प्रिया रावत, चन्द्रशेखर एवं आयुर्वेदिक चिकित्सालय के चिकित्सक सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
