क्राइमनवीनतमहरिद्वार

11 साल की बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा, लगाया अर्थदंड

ख़बर शेयर करें -

हरिद्वार। 11 साल की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में कोर्ट ने दोषी पिता को बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने 36 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। केस में तीन साल बाद अपर जिला जज, एफटीएससी, चंद्रमणि राय की अदालत ने दोषी पिता को कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।

शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान ने बताया कि 27 फरवरी 2023 को हरिद्वार के कनखल थाना क्षेत्र में पिता द्वारा ही अपनी ही नाबालिक बेटी के साथ दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी का मामला सामने आया था। आरोपी पिता के खिलाफ 11 साल की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने का केस भी कनखल थाने में दर्ज कराया गया था। आरोपी पिता पर घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी था। पीड़िता ने बताया कि करीब जब वो आठ नौ साल की थी, उसी उम्र से उसका पिता उसके साथ जबरदस्ती गलत काम करता आ रहा है।

यह बात उसने परिवार के अन्य सदस्यों को बताई भी थी, लेकिन अन्य परिजन पीड़िता की बात को अनसुना करते रहे हैं। पीड़ित ने अपने पिता निवासी कनखल हरिद्वार के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेजा। केस की जांच के बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। पीड़िता ने आरोपी पिता की मोबाइल रिकॉर्डिंग भी की थी, जो ठोस सबूत बनी। पीड़िता ने बताया लोग उसकी बात पर यकीन नहीं कर रहे थे। तब पिता व अपने बीच हुई बातचीत की मोबाइल में रिकॉर्डिंग कर ली थी। उक्त रिकॉर्डिंग को पीड़िता से लेकर आरोपी पिता की आवाज परीक्षण के लिए सीएफएसएल भेजा था।

जांच रिपोर्ट में आरोपी पिता की पुष्टि हुई. मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सरकारी पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह अदालत में प्रस्तुत किए गए। सबूतों और गवाहों के मद्देनजर कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष की कठोर कैद और 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे तीन माह अतिरिक्त का कारावास भोगना होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित बच्ची को चार लाख रुपये मुआवजा राशि एक माह में देने के आदेश दिए हैं। निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व जिलाधिकारी को भेजकर उचित प्रतिकर दिलाने के निर्देश दिए हैं।