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मर्चेंट नेवी का लापता जवान नंदन दोसाद शहीद, घर पहुंचा पार्थिव शरीर

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक दुखद खबर सामने आ रही है, जहां पर मर्चेंट नेवी में कार्यरत नंदन सिंह दोसाद का पार्थिव शरीर बीते 17 दिनों के बाद उनके घर पहुंचा है। नंदन सिंह के पार्थिव शरीर को देखकर उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनका रो रो कर बुरा हाल है। नन्दन की मौत के बाद से उनके परिजनों का एकमात्र सहारा भी छिन गया है।

जानकारी के अनुसार मूल रूप बागेश्वर जिले के गरुड़ के कौलाग के निवासी 37 वर्षीय नंदन सिंह दोसाद पुत्र हेम सिंह मर्चेंट नेवी में स्कॉर्पियो कंपनी में कार्यरत थे। दरअसल नंदन सिंह इन दिनों साउथ अफ्रीका में थे, जिनका संपर्क बीते 16 अक्टूबर से अपने परिजनों से नहीं हो पाया था। नंदन सिंह का अपने परिजनों से संपर्क ना हो पाने के कारण उनके परिजन बेहद चिंतित थे। इस बीच 16 अक्टूबर को नंदन के परिजनों को स्कॉर्पियो कंपनी से जानकारी मिली थी कि शिप में चढ़ने के दौरान छोटी बोट लहरों में पलट गई। जिसमें नंदन सिंह समेत अन्य कई लोग लापता हो गए थे। तब से नंदन सिंह के परिजन नंदन सिंह का पता लगाने की लगातार मांग कर रहे थे।

बीते रविवार की सुबह 2 नवंबर को कम्पनी की दो सदस्यीय टीम नंदन सिंह के पार्थिव शरीर को उनके गांव लेकर पहुंची। जहां पर नंदन सिंह के पार्थिव शरीर को देखकर उनके परिजन बिलख उठे। पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। जिसको भी जानकारी मिली वह नंदन के घर की ओर दौड़ पड़ा। नंदन सिंह के दो पुत्र हैं, जिनमें बड़ा पुत्र ऋतिक अभी महज 9 वर्ष का है, जबकि छोटे पुत्र भावेश की उम्र सिर्फ 6 वर्ष है। नंदन सिंह अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे जो, अपने परिजनो को हमेशा के लिए अकेला छोड़ गए हैं।

नंदन सिंह की पत्नी व माँ सदमे में…

नंदन सिंह की पत्नी गीता देवी बार बार बेसुध हो रही है, वहीं नंदन सिंह की 70 वर्षीय माता हीरा देवी अपने लाडले बेटे को याद करते ही सदमे मे चली गई है। बताते चलें क्षेत्र के पूर्व विधायक ललित फर्सवाण समेत अन्य लोगों ने कंपनी से नंदन सिंह की पत्नी को नौकरी देने और केंद्र तथा राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है, ताकि उनका जीवन इस विकट परिस्थिति से गुजर कर आगे बढ़ सके।