डबल मर्डर केस : नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी दस आरोपियों को किया बरी, निचली अदालत ने दी उम्रकैद की सजा
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को ‘संदेह से परे’ साबित करने में विफल रहा है।
यह मामला अगस्त 2014 का है। जब काशीपुर के कुंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हरनाम सिंह उर्फ हनी और कुलवंत सिंह उर्फ गोले की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी और उनके शव जंगल में मिले थे। पुलिस ने इस मामले में कश्मीर सिंह, प्रकाश सिंह, चंडी सिंह, जसवंत सिंह सहित अन्य के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया था। निचली अदालत ने मई 2025 में इन सभी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और इसमें सबूतों की कड़ी अधूरी है। उन्होंने दलील दी कि पुलिस के पास कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और केवल पिछले विवाद या धमकियों के आधार पर किसी को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। विशेष रूप से प्रकाश सिंह के वकील ने कहा कि उनका नाम तो एफआईआर में भी नहीं था।
न्यायालय ने पाया कि पुलिस द्वारा बरामद की गई रस्सियां, जिन्हें हत्या में इस्तेमाल बताया गया था, कभी भी फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजी गईं। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि उन वस्तुओं का मृतक या अभियुक्तों से कोई जैविक संबंध था। सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रकाश सिंह, चंडी सिंह, लाल सिंह, बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह (जस्सा), लखवीर सिंह, जसवंत सिंह (नंदी), भगत सिंह, प्रकाश सिंह (पासी) और दारा सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल जेल से रिहा किया जाए। इस फैसले के साथ ही 11 साल पुराने इस मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रणाली में केवल संदेह के आधार पर किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।

