चंपावतजनपद चम्पावतनवीनतम

वन्यजीवों से सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट : रंजन कुमार मिश्र

ख़बर शेयर करें -

डीएफओ कार्यालय परिसर में हुआ ‘प्रभाग दिवस’ का आयोजन

चम्पावत। प्रमुख वन संरक्षक (HOFF) उत्तराखंड रंजन कुमार मिश्र की अध्यक्षता में रविवार को वन विभाग चम्पावत की ओर से ‘प्रभाग दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम पर विशेष बल दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और वन सरपंचों से सीधे संवाद करते हुए उन्हें वन संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और वन्यजीवों की सुरक्षा के महत्व से अवगत कराया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने कहा कि हाल के दिनों में गुलदार और भालू के हमलों में वृद्धि हुई है, जिसे देखते हुए वन विभाग अलर्ट पर है। उन्होंने बताया कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है। साथ ही ग्रामीणों और सरपंचों से अपील की गई है कि वे जैविक कूड़ा आबादी वाले क्षेत्रों में न फेंकें, क्योंकि इससे वन्यजीव, विशेष रूप से भालू आकर्षित होते हैं। मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार ने वन्यजीव हमलों के मामलों में मुआवजा राशि बढ़ा दी है, ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र सहायता मिल सके। कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह, दर्जा राज्यमंत्री श्याम नारायण पांडे, नगरपालिका अध्यक्षा प्रेमा पांडेय, डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल, रेंजर बृजमोहन टम्टा, हिमालय सिंह टोलिया, चंद्रशेखर जोशी सहित विभागीय अधिकारी, तमाम सरपंच व ग्रामीण मौजूद रहे।

चम्पावत में प्रभाग दिवस कार्यक्रम में वनकर्मियों से संवाद करते प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र।

भालू और तेंदुए के लिए बनाए जाएंगे राहत केंद्र

चम्पावत। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने कहा कि चम्पावत जिले के काफी बड़े हिस्से में चौड़ीपत्ती का जंगल हैं। इसे बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। वनों को संरक्षित करते हुए आय संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की थीम (इकॉलोजी, इकॉनोमी और इनावायरमेंट) को जमीन में उतार संतुलित और समग्र विकास किया जाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक मिश्र ने कहा कि चम्पावत ही नहीं, उत्तराखंड के कई डिवीजनों में डीएफओ के स्तर के अधिकारियों की कमी है। चम्पावत में डीएफओ की तैनाती जल्द कराने के प्रयास होंगे। उत्तराखंड के कई जिलों में एक से अधिक डिवीजन हैं। एक जिला एक डिविजन पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसे लेकर चर्चा चल रही है। जो भी निर्णय होगा, जनहित के दृष्टिगत होगा।
मानव-वन्य जीव संघर्ष से बचाव विभाग की शीर्ष प्राथमिकता है। इसके लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। इस साल अब तक भालू के हमले में ही 23 लोग मारे गए और 101 घायल हुए हैं। भालू से होने वाली फसल क्षति की भरपाई करने की योजना भी है। कहा कि उत्तराखंड में भालू और तेंदुए के लिए राहत केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में पकड़े गए तेंदुओं और भालुओं को रखा जाएगा।
दावाग्रि, भूकटाव से बचाव के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बरसात में फलदार पौधों का 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत रोपण किया जाएगा। जैविक कूड़े से बचाव भी जरूरी है। प्रमुख वन संरक्षक मिश्र ने कहा कि दावाग्रि से बचाव के लिए वन विभाग सालभर तैयारी कर रहा है। इसमें जन सहयोग भी जरूरी है। बरसात में भूमिगत पानी को बचाने के लिए पौधारोपण और अन्य उपाय किए जा रहे हैं। प्रदेश में वन पंचायत के सरपंच सहित दो बड़े सम्मेलन होंगे। पिरूल प्रबंधन के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। चंपावत के भिंगराड़ा क्षेत्र में पिरूल से रोजगार को जोड़ने के लिए काम हो रहा है।