रेखा आर्य की कथित ₹200 करोड़ की संपत्ति की ईडी-सीबीआई जांच हो: हरीश रावत
पति के आरोपों पर मुख्यमंत्री धामी से मांगा जवाब, बोले- भ्रष्टाचार की शिकायत हुई तो कार्रवाई बताएं, नहीं तो आरोपों का खंडन करें
देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़ ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जवाब मांगते हुए रेखा आर्य पर उनके पति की ओर से लगाए गए कथित भ्रष्टाचार और 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के आरोपों की ईडी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। रावत ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के सामने मंत्री के विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत रखी गई थी, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस पर क्या कार्रवाई हुई।
हरीश रावत ने कहा कि रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के वायरल हो रहे वीडियो में कही जा रही बातें गंभीर हैं और इनसे प्रदेश की जनता को चिंता होनी चाहिए। उन्होंने रेखा आर्य की ओर से पति पर लगाए गए उत्पीड़न और जान को खतरे के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। रावत ने मांग की कि प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के अनुरूप पुलिस उचित कानूनी कार्रवाई करे और गिरफ्तारी की आवश्यकता होने पर कानून के अनुसार कदम उठाए।
मुख्यमंत्री से पूछा- शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
पूर्व मुख्यमंत्री ने गिरधारी लाल साहू के उस कथित बयान को भी गंभीर बताया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रेखा आर्य के विभाग में भ्रष्टाचार की जानकारी देने की बात कही है। रावत ने कहा कि यदि साहू ने वास्तव में मुख्यमंत्री को ऐसी शिकायत दी थी, तो सरकार को बताना चाहिए कि उस पर क्या कार्रवाई की गई। यदि ऐसा कोई मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में नहीं लाया गया, तो साहू के दावे का स्पष्ट खंडन किया जाना चाहिए।
रावत के मुताबिक, इस प्रकरण में आरोप लगाने वाले कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं मंत्री के पति हैं। उन्होंने साहू पर भी गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है।
‘200 करोड़ की संपत्ति का आरोप बेहद गंभीर’
रेखा आर्य की कथित 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर रावत ने कहा कि सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले किसी व्यक्ति के पास इतनी बड़ी संपत्ति होने के आरोपों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 1968-69 में कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद ब्लॉक प्रमुख, युवक कांग्रेस के विभिन्न पदों और सांसद सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बावजूद उनकी संपत्ति को लेकर भी सवाल उठें, तो उसके स्रोतों का हिसाब देना पड़ेगा।
रेखा आर्य के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा कि वर्ष 2014 में सोमेश्वर से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने के लिए उन्होंने उनके नाम की संस्तुति की थी। वर्ष 2016 में रेखा आर्य भाजपा में शामिल हो गईं और 2017 से मंत्री पद पर हैं। रावत ने उनके राजनीतिक सफर और पति की ओर से लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों को जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
हालांकि, रेखा आर्य की संपत्ति के वास्तविक मूल्य और उसके स्रोतों को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इन आरोपों को जांच के निष्कर्ष के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
विपक्षी नेताओं पर ही कार्रवाई क्यों?
हरीश रावत ने केंद्र की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इस मामले में जांच नहीं होती, तो इससे यह संदेह और गहरा होगा कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की कार्रवाई केवल विपक्षी नेताओं तक सीमित है। उन्होंने मांग की कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर संपत्ति के स्रोतों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
रेखा आर्य और उनके पति के बीच आरोप-प्रत्यारोप के इस मामले में अब मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही, कथित भ्रष्टाचार, संपत्ति के स्रोतों और पारिवारिक विवाद से जुड़े आरोपों की जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

