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चम्पावत में पारंपरिक क​ला से हो रहा पार्कों का सौंदर्यीकरण

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स्थानीय महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से सांस्कृतिक संरक्षण और आजीविका को मिल रहा सशक्त आधार

चम्पावत। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं एवं पारंपरिक कला शैलियों के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा देने के उद्देश्य से चम्पावत में एक अभिनव एवं प्रेरणादायी पहल की जा रही है। इसके तहत डिप्टेश्वर मंदिर के समीप स्थित पार्क सहित नगर क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण पारंपरिक लोक कला एवं स्थानीय शिल्प के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे ये स्थल न केवल अधिक आकर्षक एवं दर्शनीय बनेंगे, बल्कि स्थानीय संस्कृति, आस्था और परंपरा के जीवंत प्रतीक के रूप में भी उभरेंगे।

पालिकाध्यक्ष प्रेमा पांडेय व ईओ भरत त्रिपाठी ने बताया कि नगर क्षेत्र में पालिका द्वारा विकसित पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक कच्चा माल राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उपलब्ध कराया गया है। इन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपनी पारंपरिक कला दक्षता का उपयोग करते हुए ऐपण कला, दीवार चित्रकारी, लोक प्रतीकों, सांस्कृतिक आकृतियों एवं स्थानीय शिल्प के माध्यम से पार्कों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान कर रही हैं।

पारंपरिक रंगों, आकृतियों एवं प्रतीकों के प्रयोग से पार्कों की दीवारें और संरचनाएं उत्तराखंड की लोक संस्कृति की कहानी कहती प्रतीत हो रही हैं। यह पहल नगर के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कौशल उन्नयन एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इस कार्य से न केवल रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, बल्कि उनकी पारंपरिक कला को सम्मान एवं मंच भी मिल रहा है, जिससे उनकी आजीविका सुदृढ़ हो रही है और आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है।

वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक कला के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय कारीगरों एवं महिलाओं को सतत रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा नई पीढ़ी को भी अपनी लोक कला एवं परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, इस प्रकार की पहल से चम्पावत क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी।