रेखा आर्या विवाद पर CM धामी का बयान, बोले- जांच के बाद ही तय होगी आरोपों की सच्चाई
210 करोड़ की कथित संपत्ति से लेकर वायरल ऑडियो तक उठे सवाल; एसआईटी कर रही जांच, गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने का मामला भी चर्चा में
देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। उन्होंने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानून के अनुसार जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति से जुड़े आरोपों पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि किसी रिकॉर्डिंग में कुछ कहे जाने मात्र से आरोप प्रमाणित नहीं हो जाते। उनकी सत्यता की जांच जरूरी है। उन्होंने लंबे समय तक साथ रहने के बाद आरोप सामने आने के समय को लेकर भी सवाल उठाया, लेकिन स्पष्ट किया कि मामले का निर्णय व्यक्तिगत दावों के बजाय तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

कैंट थाने में शिकायत से शुरू हुआ विवाद
मामले ने 15 अक्टूबर को उस समय तूल पकड़ा, जब रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने कथित उत्पीड़न, मारपीट की कोशिश, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धमकी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए।
मंत्री ने कंपनी से जुड़े दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग के जरिए उन्हें निदेशक पद से हटाने का प्रयास किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह दावा भी किया कि विवाह के समय उन्हें पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी। इन आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी है।
वायरल ऑडियो में पैसों और संपत्ति से जुड़ी बातचीत का दावा
शिकायत के बाद रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर दो कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग साझा कीं। दावा किया गया कि इनमें गिरधारी लाल साहू और कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी के बीच बातचीत हुई है। कथित बातचीत को लेकर पैसों के लेनदेन, कानूनी सहायता, जेल-जमानत, 25 लाख रुपये, आगरा में फ्लैट खरीदने और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषय चर्चा में आए।
हालांकि, इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और बातचीत के वास्तविक संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी जरूरी है। जांच में रिकॉर्डिंग की सत्यता, संबंधित लोगों की पहचान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण अहम होगा।
एसआईटी के हवाले जांच, बरेली में भी साक्ष्य जुटाने की जानकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। टीम के सदस्यों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। जांच के तहत दस्तावेजों, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। बरेली में भी साक्ष्य जुटाने के लिए टीम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। गिरधारी लाल साहू के ठिकाने को लेकर भी चर्चाएं हैं। उनके उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल जाने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन इस दावे की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। उनकी स्थिति और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर जांच से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
210 करोड़ की कथित संपत्ति पर भी सवाल
विवाद में 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोप भी चर्चा में हैं। रेखा आर्या ने कहा है कि शिकायत वापस लेने की बात के साथ भ्रष्टाचार के आरोप जोड़ना उन्हें दबाव बनाने जैसा लगता है। उन्होंने संपत्ति संबंधी आरोपों की जांच कराने की बात भी कही।
मंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उनकी राजनीतिक यात्रा 2003 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। उनके अनुसार, उन्होंने 2003, 2012, 2014 और 2022 के चुनावी हलफनामों में अपनी संपत्ति का विवरण दिया है। हालांकि, कथित संपत्ति से जुड़े आरोपों की सच्चाई का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
पुराने विवाद का भी हो रहा जिक्र
कथित ऑडियो में कल्पना मिश्रा का नाम सामने आने के बाद रेखा आर्या और उनके बीच सितंबर 2024 में हुए विवाद का भी उल्लेख हो रहा है। जानकारी के अनुसार, उस समय मंत्री ने बरेली में शिकायत देकर दस्तावेजों और आवासीय पते के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था। शिकायत में सरकारी चिह्नों वाली गाड़ी के इस्तेमाल तथा घर से सात लाख रुपये और सोने की रुद्राक्ष माला गायब होने संबंधी आरोपों का भी जिक्र था। इन मामलों में भी आरोपों और निष्कर्षों को आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज, अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों का किया उल्लेख
मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के तहत गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देहरादून की पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं एससी-एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश अंजलि बेंजवाल की अदालत ने प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद राहत देने से इनकार किया।
बचाव पक्ष ने विवाद को घरेलू और आर्थिक प्रकृति का बताते हुए दलीलें दीं। वहीं, अभियोजन ने घटना के समय आवास पर अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी का पक्ष रखा। अदालत ने प्रथमदृष्टया माना कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। इसी आधार पर अधिनियम की धारा 18 और 18ए के तहत अग्रिम जमानत पर लागू प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए याचिका खारिज कर दी गई। हालांकि, अग्रिम जमानत याचिका खारिज होना आरोपों की अंतिम पुष्टि या दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें
रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू से जुड़ा विवाद अब कई स्तरों पर जांच के दायरे में है। एक ओर कथित उत्पीड़न और दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप हैं, तो दूसरी ओर वायरल ऑडियो और कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े दावों की सत्यता पर सवाल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई पर जोर दिया है। अब निगाहें एसआईटी की जांच, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

