चम्पावत : हत्या और एससी एसटी एक्ट के चार आरोपियों को मिली उम्र की कैद की सजा
चम्पावत। धौन क्षेत्र में सात साल पहले हुए हत्याकांड के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को हत्या व एससीएसटी एक्ट मामले का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 50 हजा-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जनवरी 2019 में चम्पावत जिले के बड़पास निवासी (हाल निवासी ग्राम बग्गा चौवन, जिला ऊधमसिंह नगर) दीपक कुमार ने चम्पावत पुलिस को तहरीर देकर बताया कि 5 वर्ष पूर्व उसके भाई पप्पू कुमार ने धौन निवासी एक महिला से प्रेम विवाह किया था। 18 दिसंबर 2018 को सुबह घर से चम्पावत के लिए निकला उसका भाई पप्पू लापता हो गया था। जनवरी 2019 को उसके भाई का शव धौन से कुछ दूरी पर एक होटल के पास खाई में मिला। पोस्टमार्टम के बाद पप्पू का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। बाद में दीपक कुमार को पता चला कि उसका भाई पप्पू दिसंबर 2018 को रविश भट्ट नाम के व्यक्ति के टिप्पर से चम्पावत के लिए बैठा था। रात करीब को धौन में एक होटल में खाना खाने के लिए रुका था। वहां उसके भाई का रविश, कैलाश, नवीन और नरेश भट्ट नाम के चालक से झगड़ा हो गया था।
दूसरी जाति की महिला से शादी करने के कारण उसके भाई से रंजिश रखते थे। प्रार्थी ने आशंका जताई थी कि इस कारण उन्होंने भाई के साथ झगड़ा कर हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और एससी एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
आरोप पत्र दाखिल होने के बाद विशेष सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। विशेष सत्र न्यायाधीश जिला जज अनुज कुमार संगल तमाम दस्तावेजों, दलीलों और साक्ष्यों के परीक्षण एवं गवाहों को सुनने के बाद चारों आरोपियों को दोषी पाया। कैलाश भट्ट, नवीन भट्ट निवासी बस्तिया गूंठ और रविंद्र भट्ट उर्फ रवीश भट्ट और नरेश भट्ट निवासी स्वांला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।

