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उत्तराखंड की बेटी भागीरथी बिष्ट ने दिल्ली मैराथन में जीता सिल्वर मेडल

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भागीरथी बिष्ट ने दिल्ली मैराथन 2 घंटे 43 मिनट में पूरी की, एशियन गेम्स में मेडल जीतने का है प्लान

चमोली/पौड़ी गढ़वाल। रविवार को दिल्ली में आयोजित हुए मैराथन में उत्तराखंड की भागीरथी बिष्ट ने फुल मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। नेशनल और हैदराबाद मैराथन विनर भागीरथी की इस सफलता से उनके गृह क्षेत्र चमोली के देवाल में खुशी की लहर है।

भागीरथी बिष्ट ने महिला वर्ग में 42.195 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे 43 मिनट में पूरी की। इस तरह भागीरथी ने रजत पदक अपने नाम किया। भागीरथी रजत पदक जीतने से खुश है, लेकिन गोल्ड मेडल नहीं जीत पाने की कसक भी नजर आई। उसने कहा है कि आगे और मेहनत से अपने प्रयास जारी रखेगी। दिल्ली मैराथन का ये 11वां एडिशन था। इससे पहले उत्तराखंड के ही नितिन रावत भी ये मैराथन जीत चुके हैं।

भागीरथी बिष्ट का जन्म उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल स्थित वाण गांव में हुआ। जब वह सिर्फ 3 साल की थी तो असमय पिता का निधन हो गया। पिता किसान थे तो परिवार के लिए बहुत कठिन समय आ गया। मां ने बेटी को किसी तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। भागीरथी स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी। इससे उनके मन में खेलों की दुनिया में ही करियर बनाने का सपना पलने लगा। जब वो उच्च शिक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश गई, तो वहां कोच सुनील शर्मा ने उनके खेल करियर को उड़ान दे दी।
भागीरथी बिष्ट ने सबसे पहले हिमाचल में कॉलेज की जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में सफलता पाना शुरू किया। इस दौरान कठिन प्रशिक्षण का दौर चलता रहा। भागीरथी के कोच सुनील शर्मा ने बताया कि वे लोग प्रशिक्षण के लिए सुबह 3 बजे उठते और 8 बजे तक अभ्यास चलता रहता। फिर शाम में भी 3 बजे से 7 बजे तक अभ्यास होता। इस तैयारी ने भागीरथी बिष्ट को लंबी दूरी की धावक के रूप में तैयार कर दिया। राष्ट्रीय स्तर पर भागीरथी ने सबसे पहले 2025 में हाफ मैराथन जीतकर अपने आने की आहट दे दी।

इसके बाद इसी साल भागीरथी नेशनल मैराथन 2025 की विनर बनी। इसी साल सफलता का ग्राफ और बढ़ा और उन्होंने हैदराबाद मैराथन 2025 भी जीत ली। हैदराबाद मैराथन में भागीरथी बिष्ट ने 42.195 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे 51 मिनट में पूरी की थी। ठीक एक साल बाद 22 फरवरी 2026 को जब उन्होंने दिल्ली मैराथन में सिल्वर मेडल जीता, तो उनका समय 2 घंटे 43 मिनट रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस एक साल में भागीरथी बिष्ट और उनके कोच सुनील शर्मा ने कितनी मेहनत की।

भागीरथी बिष्ट को उम्मीद है कि दिल्ली मैराथन में 2 घंटे 43 मिनट के समय के साथ उन्हें एशियम गेम्स के लिए चुन लिया जाएगा। अब वह एशियन गेम्स की तैयारी में जुट जाएगी। उसे उम्मीद है कि वो आगे अच्छा करेगी और देश के साथ ही प्रदेश का नाम रोशन करेगी।