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मीडिया में सरकार की नीतियों की आलोचना राष्ट्र विरोधी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई लताड़

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए मीडिया द्वारा की जाने वाली आलोचना को राष्ट्र विरोध बताने पर केंद्र सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जमा करना न्याय और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक मलयालम समाचार चैनल से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए गंभीर टिप्पणी की है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मीडिया का स्वतंत्र रहना जरूरी है और सरकार की नीतियों की आलोचना करना राष्ट्र विरोधी नहीं करार दिया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने मीडिया को भी नसीहत देते हुए कहा कि प्रेस की जिम्मेदारी बनती है कि वो सच को सामने रखे। लोकतंत्र मजबूत रहे इसके लिए मीडिया का स्वतंत्र रहना जरूरी है। उससे ये उम्मीद नहीं की जाती है कि वो सिर्फ सरकार का पक्ष रखे।

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सुप्रीम कोर्ट ने चैनल की याचिका पर अपना अंतरिम फैसला सुनाते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को चार सप्ताह के भीतर लाइसेंस रिन्यू करने का आदेश दिया है। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दायर करना न्याय और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र प्रेस जरूरी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला हवा में नहीं दिया जा सकता है। इसके पीछे ठोस कारण होने चाहिए।

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