युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड: पूर्व सहकर्मी समेत दो गिरफ्तार, उत्तराखंड से दबोचे गए
दिल्ली के 31 वर्षीय युवराज की गुमशुदगी ने लिया हत्या का रूप, गुरुग्राम के नाले में मिला था शव; कथित वित्तीय विवाद की भी जांच
नई दिल्ली/गुरुग्राम। दिल्ली के सरिता विहार निवासी 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की गुमशुदगी का मामला हत्या में बदल गया है। गुरुग्राम के सेक्टर-70 क्षेत्र में नाले से बरामद शव की पहचान युवराज के रूप में होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर को युवराज अपनी बहन के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में शादी की खरीदारी करने गया था। इसके बाद दोनों लाजपत नगर-2 स्थित एक रेस्टोरेंट पहुंचे। इसी दौरान युवराज ने परिवार को बताया कि उसे गुरुग्राम में एक जरूरी बैठक में जाना है और वह रात तक वापस लौट आएगा। इसके बाद वह घर नहीं पहुंचा। परिवार ने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला।
कई दिनों तक युवराज की कोई जानकारी नहीं मिलने पर उसकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस ने युवराज के मोबाइल से जुड़े कॉल डिटेल और इंटरनेट रिकॉर्ड खंगाले। तकनीकी जांच में उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से संपर्क की जानकारी सामने आई। परिवार ने भी पुलिस को बताया कि युवराज गुरुग्राम में आन्या से मिलने की बात कहकर निकला था।
नए नंबर से मिला आरोपियों का सुराग
पुलिस ने आन्या की तलाश शुरू की, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला। जांच में पता चला कि वह एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही थी। तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस को उस नंबर की लोकेशन उत्तराखंड में मिली। इसके बाद पुलिस टीम उत्तराखंड पहुंची और आन्या वत्स तथा संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने युवराज की हत्या करने और शव को गुरुग्राम के सेक्टर-70 क्षेत्र में ठिकाने लगाने की बात कथित तौर पर स्वीकार की है। हालांकि पुलिस आरोपियों के बयानों की उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि कर रही है।
पूर्व सहकर्मी से था कथित आर्थिक विवाद
प्रारंभिक जांच में युवराज और आन्या के बीच कथित वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद की बात सामने आई है। दोनों पहले एक रियल एस्टेट कंपनी में साथ काम कर चुके थे। पुलिस इस पुराने संबंध और कथित आर्थिक विवाद को हत्या के संभावित कारण के तौर पर जांच रही है।
परिवार की ओर से भी दोनों के बीच पहले से विवाद होने की बात कही गई है। हालांकि हत्या का वास्तविक कारण क्या था और वारदात किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है।
कार में रखा था शव, फिर नाले में फेंका
पूछताछ में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, वारदात के बाद युवराज का शव कुछ घंटों तक कार में रखा गया। इसके बाद आरोपियों ने शव को गुरुग्राम के सेक्टर-70 इलाके में एक नाले में फेंक दिया और वहां से उत्तराखंड चले गए। पुलिस अब वाहन, घटनास्थल, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी एवं फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
नाले से बरामद शव की ऐसे हुई पहचान
गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को सेक्टर-70 के एक नाले से शव बरामद किया था। शुरुआती स्तर पर शव की पहचान नहीं हो सकी थी। युवराज की तलाश के दौरान दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया और शव की तस्वीरें प्राप्त कीं। परिवार को तस्वीरें दिखाए जाने के बाद शव की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में हुई।
इसके बाद दिल्ली में दर्ज गुमशुदगी का मामला हत्या की जांच से जुड़ गया। पुलिस अब कथित वित्तीय विवाद, आरोपियों की गतिविधियों, वाहन, घटनास्थल और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

