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1002 निराश्रित गौवंश को मिला आश्रय, निर्धारित क्षमता से अधिक पशु गौशालाओं में संरक्षित

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चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘आदर्श चम्पावत’ के विजन को साकार करने की दिशा में जिले में निराश्रित और आवारा गौवंश के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को गति मिल रही है। पशुपालन विभाग और स्थानीय गौशाला समितियों के प्रयासों से अगस्त 2026 तक जिले में 1002 निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा चुका है।

मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी चम्पावत डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल ने बताया कि अगस्त 2026 की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार जिले की पंजीकृत गौशालाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक गौवंश को संरक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2023-24 से निर्धारित 919 निराश्रित गौवंश के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 1002 गौवंश को संरक्षित किया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य से 83 अधिक है।

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750 की क्षमता, 1002 गौवंश संरक्षित

जिले की पांच प्रमुख गौशालाओं की कुल स्वीकृत क्षमता 750 गौवंश है, जबकि वर्तमान में इनमें 1002 गौवंश को आश्रय दिया जा रहा है।

गौशालाओं में संरक्षित गौवंश का विवरण इस प्रकार है—

  • मां कामधेनु वात्सल्य सेवाधाम, लोहाघाट: क्षमता 225, संरक्षित 375
  • श्री नित्य आश्रम गौसेवा समिति, कालाझाला टनकपुर: क्षमता 200, संरक्षित 260
  • मां पूर्णागिरी गौसेवा समिति, गरसाड़ी पाटी: क्षमता 75, संरक्षित 98
  • भारद्वाज गो सेवा समिति, थापलागूंठ पाटी: क्षमता 50, संरक्षित 76
  • गर्ग ऋषि गोसेवा समिति, किमाड़ पाटी: क्षमता 200, संरक्षित 193

इस तरह गौशालाओं में स्वीकृत क्षमता से 252 अधिक गौवंश को संरक्षण दिया जा रहा है।

सड़कों को बेसहारा गौवंश से मुक्त करने का लक्ष्य

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट विजन है कि ‘आदर्श चम्पावत’ में कोई भी गौवंश सड़कों पर बेसहारा न घूमे। इसी दिशा में निर्धारित क्षमता से अधिक गौवंश होने के बावजूद गौशालाओं में उनके पौष्टिक चारे, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग का कहना है कि निराश्रित गौवंश के संरक्षण के साथ-साथ सड़कों को सुरक्षित बनाने, किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाने और गौ-संरक्षण व्यवस्था को आधुनिक एवं मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।