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टनकपुर में शारदा कॉरिडोर कार्य के दौरान जेसीबी चलने से विवाद, आज तहसील सभागार में होगी बैठक

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टनकपुर/चम्पावत। टनकपुर के शारदा घाट/शारदा चुंगी क्षेत्र में शारदा कॉरिडोर परियोजना के तहत गुरुवार देर शाम ठेकेदार कंपनी द्वारा जेसीबी चलाए जाने के बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना उनके आशियानों के समीप जेसीबी चलाकर नुकसान पहुंचाया गया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जेसीबी चलने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और विरोध जताया। सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। समय रहते हस्तक्षेप होने से मामला शांत हो गया और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

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स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने कार्रवाई से पहले न तो प्रशासन के माध्यम से पर्याप्त सूचना दी और न ही प्रभावित परिवारों को विश्वास में लिया। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक हस्तक्षेप समय पर नहीं होता तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था। प्रभावित परिवारों ने उनके हुए नुकसान की भरपाई किए जाने की भी मांग उठाई है।

विरोध कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट शारदा कॉरिडोर के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परियोजना के नाम पर गरीब परिवारों के साथ मनमाना व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की।

इस बीच, कांग्रेस के पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि बिना उचित पुनर्वास और मुआवजे के किसी भी गरीब परिवार को उजाड़ने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।

घटना के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से माहौल शांत कराया गया। मामले के समाधान के लिए आज (शुक्रवार) शाम 4 बजे तहसील सभागार, टनकपुर में विभागीय अधिकारियों, कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक बुलाई गई है। बैठक में प्रभावित पक्षों की बात सुनने के साथ आगे की कार्रवाई और समाधान पर चर्चा की जाएगी।

प्रशासन की ओर से बैठक के बाद ही आगे की स्थिति और निर्णय स्पष्ट होने की संभावना है। वहीं स्थानीय लोग बैठक से पुनर्वास, मुआवजा और परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर ठोस आश्वासन की उम्मीद लगाए हुए हैं।