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डॉक्टरों के पर्चों पर नाम, योग्यता और मेडिकल काउंसिल पंजीकरण संख्या युक्त मुहर लगाना अनिवार्य, आदेश जारी

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चम्पावत। उत्तराखंड के चिकित्सा क्षेत्र में उच्चतम पारदर्शिता सुनिश्चित करने, मरीजों के अधिकारों की रक्षा करने तथा विधिक जटिलताओं से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखण्ड द्वारा प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) तथा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के सुसंगत प्रावधानों के तहत अब प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों, क्लीनिकों, नर्सिंग होम और चैरिटेबल अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए परामर्श पत्र (प्रिस्क्रिप्शन) पर एक विशिष्ट मुहर (स्टैम्प) का प्रयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है।

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इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक पंजीकृत चिकित्सक द्वारा ओपीडी पर्चों, डिस्चार्ज समरी, रेफरल लेटर्स या किसी भी चिकित्सकीय प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर के साथ एक स्पष्ट मुहर लगानी होगी, जिसमें तीन प्रमुख जानकारियां स्पष्ट और पठनीय रूप में अंकित होना आवश्यक है। इस मुहर में चिकित्सक का पूरा नाम, उनकी धारित वैध शैक्षणिक योग्यता या डिग्री (जैसे- M.B.B.S., M.D.) और उत्तराखण्ड या भारतीय चिकित्सा परिषद की पंजीकरण संख्या अनिवार्य रूप से अंकित होनी चाहिए। विभाग के संज्ञान में यह आया था कि कुछ चिकित्सालयों और निजी क्लीनिकों में डॉक्टर अपनी स्पष्ट पहचान अंकित नहीं कर रहे थे, जिससे योग्य चिकित्सकों तथा अनधिकृत या अपंजीकृत व्यक्तियों के बीच भेद करना कठिन हो जाता था।

जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस शिथिलता को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में औचक एवं नियमित निरीक्षण टीमों का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें चिकित्सालयों में जाकर यह सत्यापित करेंगी कि ओपीडी पर्चों पर मानक मुहर का उपयोग हो रहा है या नहीं। यदि कोई भी चिकित्सक या चिकित्सालय इस व्यवस्था का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है अथवा बिना वैध मुहर व पंजीकरण संख्या के परामर्श जारी करता है, तो इसे क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट तथा चिकित्सा परिषद के नियमों के अधीन गंभीर कदाचार मानते हुए चिकित्सालय के पंजीकरण निलंबन सहित दंडात्मक विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, और किसी भी प्रकार की शिथिलता के लिए संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
चम्पावत जनपद में भी जिलाधिकारी द्वारा इस आदेश के व्यापक प्रचार-प्रसार और कड़ाई से अनुपालन के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।