टनकपुर : हाईटेक निगरानी और सुरक्षा दीवार से सुरक्षित होंगे आसपास के गांव
एआई अलर्ट सिस्टम से अब पहले ही मिलेगी खतरे की चेतावनी
टनकपुर/चम्पावत। टनकपुर क्षेत्र के ग्राम गैडाखाली नंबर-1 एवं ऊचौलीगोठ के ग्रामीणों द्वारा जंगली हाथी और अन्य वन्यजीवों से सुरक्षा की मांग को गंभीरता से लेते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार वन विभाग ने त्वरित और प्रभावी कदम उठाए हैं। जनभावनाओं को प्राथमिकता देते सीएम के निर्देशानुसार उप प्रभागीय वनाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर हाथियों की रोकथाम हेतु पत्थर की सुरक्षा दीवार के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन कर शीघ्र प्राक्कलन प्रस्तुत किया जाए। वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों द्वारा फसल या संपत्ति को हुए नुकसान की स्थिति में शासन के मानकों के अनुरूप त्वरित मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया को और अधिक गति दी गई है।



क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेंज स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRT) तैनात किया गया है, जो 24 घंटे गश्त कर वन्यजीवों को आबादी से दूर रखने का कार्य कर रहा है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने हेतु विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें सुरक्षित व्यवहार एवं वन क्षेत्रों में अनावश्यक प्रवेश से बचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखने के उद्देश्य से जंगलों के भीतर स्थित वाटरहोल एवं जलकुंडों में टैंकरों के माध्यम से नियमित जल आपूर्ति की जा रही है, जिससे भोजन और पानी की तलाश में उनका आबादी की ओर रुख कम हो।
उल्लेखनीय है कि गत वित्तीय वर्ष में विभाग द्वारा लगभग 13 किलोमीटर सोलर फेंसिंग की मरम्मत, नई फेंसिंग की स्थापना तथा सोलर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था कर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया गया है। इसी क्रम में हल्द्वानी वन प्रभाग द्वारा नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में ‘एआई आधारित स्मार्ट सोलर पावर्ड वाइल्डलाइफ डिटेक्शन कैमरा’ प्रणाली स्थापित की जा रही है। यह अत्याधुनिक प्रणाली हाथियों जैसे बड़े वन्यजीवों की पहचान कर ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ के माध्यम से सायरन बजाकर ग्रामीणों को तत्काल सतर्क करती है।
सौर ऊर्जा से संचालित यह तकनीक दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रभावी है तथा इसके जरिए वन अधिकारियों को मोबाइल एप एवं व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना प्राप्त होती है, जिससे समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में ऊचौलीगोठ एवं गैडाखाली क्षेत्रों में इसका परीक्षण किया जा रहा है, जो भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगा।

