उत्तराखंड की ट्राउट मछली को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार; पहली बार हुआ पांच मीट्रिक टन का निर्यात, हुई लाखों की आय
देहरादून। उत्तराखंड की रेनबो ट्राउट मछली अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पकड़ बना ली है। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं। आने वाले समय में राज्य से करीब 30 टन और मछलियों के निर्यात की तैयारी है। इसके अलावा निर्यात में तेजी के लिए मत्स्य विभाग प्रोसेसिंग यूनिट को भी तैयार कर रहा है।
यह जानकारी मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला, मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने ये मछलियां तैयार की थीं। इससे 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.50 लाख की आय हुई है। इसके लिए मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग व परिवहन के लिए 5.40 लाख की गैप फंडिंग सहायता प्रदान की।
कैबिनेट मंत्री बहुगुणा ने बताया कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं हितधारकों से स्थापित संपर्कों का यह सकारात्मक परिणाम है कि विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बाजारों में भी निर्यात की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है। इस क्रम में आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछली का निर्यात विदेशों में किए जाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि चमोली, पिथौरागढ़ और सितारगंज के एक्वा फार्म में प्रोसेसिंग यूनिट को तैयार किया जा रहा है। जहां पर मछली की सफाई, उसकी बेहतर पैकिंग हो सकेगी। सितारगंज का एक्वा फार्म भी कुछ महीनों में तैयार हो जाएगा। मछली के कोल्ड स्टोरेज की सुविधा भी होगी, ऐसे में मत्स्य पालक के पास विकल्प होगा, जब उसे अच्छे दाम नहीं मिल रहे तो वह स्टोर कर ले और जब बेहतर रेट मिल रहे हो तो वह मछली की बिक्री कर सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इसके सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक 2.10 करोड़ की ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।
मंत्री बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2012-17 में जहां मात्र दो प्रतिशत थी, वह बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य में 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य लगभग 165 करोड़ है। विभाग का बजट भी बढ़ा है। कहा कि नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। प्रेस वार्ता में निदेशक मत्स्य चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी उपस्थित रहे।
उत्तराखंड में ट्राउट फिश का क्या है इतिहास
उत्तराखंड के हिमालयन ट्राउट फिश का इतिहास करीब 150 साल पुराना यानी ब्रिटिश काल का है। दरअसल, ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1850 के दशक में अंग्रेज ट्राउट फिश का बीज, स्विट्जरलैंड से लेकर आए थे। इसके बाद से ही ट्राउट फिश, उत्तराखंड के हिमालय राज्यों की पहचान बनी हुई है, लेकिन अभी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह चुनौती है ट्राउट फिश के बीज। दरअसल, डिमांड ज्यादा होने पर ट्राउट फिश के बीज को डेनमार्क से खरीदने पड़ रहे हैं, जो काफी ज्यादा महंगे पड़ते हैं। क्योंकि, उत्तराखंड में अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम नहीं है। फिलहाल, राज्य सरकार अत्याधुनिक हैचरी और कोल्ड स्टोरेज चैन सिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रही है। जिससे ट्राउट फिश के बीज यही तैयार हो सकेंगे।
हिमालयन ट्राउट फिश उत्तराखंड का एक प्रीमियम फिश यानी मछली है। जिसका उत्पादन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में किया जा रहा है। जिसकी मुख्य वजह यही है कि वहां पर कोल्ड रनिंग वाटर उपलब्ध है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 250 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन हो गया है। करीब 800 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का उत्पादन 1625 रेसवेज के जरिए उत्पादन हुआ हैं। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10,011 परिवार मत्स्य पालन से जुड़े हुए थे। जिनकी संख्या साल 2025- 26 में बढ़कर 15,657 हो गई है। खास बात यह है कि इन सभी मत्स्य पालकों में 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल है।

