देशनवीनतम

दिग्गज पत्रकार रेहान फजल ने बीबीसी को कहा अलविदा

ख़बर शेयर करें -

नई दिल्ली। हिंदी पत्रकारिता जगत के जाने-माने नाम और बीबीसी (BBC) के दिग्गज पत्रकार रेहान फजल ने संस्थान से अपनी लंबी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बीबीसी को अलविदा कह दिया है।

रेहान फजल पिछले कई दशकों से बीबीसी हिंदी के साथ जुड़े हुए थे। उन्हें विशेष रूप से उनके ऐतिहासिक वृत्तांतों, गहरी रिसर्च और उनके खास प्रोग्राम ‘विवेचना’ के लिए जाना जाता है। उनकी आवाज और कहानी सुनाने के अंदाज ने उन्हें रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था।

Ad Ad

विदाई संदेश

संस्थान छोड़ते समय उन्होंने अपने सहयोगियों और पाठकों का आभार व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं और अगले कदम के बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

सोशल मीडिया में जारी संदेश में उन्होंने कहा है कि …. अलविदा विवेचना…
बीबीसी के साथ ३० वर्ष के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान मैं कई खट्टे मीठे अनुभवों को जीते हुए पत्रकारिता की कड़ी चुनौतियों से गुज़रा हूँ. बीबीसी के साथ जुड़ना मेरे लिए गौरव की बात रही है. अगर मैं कहूँ कि मैंने काम की आज़ादी, निर्णय की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, तथ्यों की प्रामाणिकता, रोमांच और निडरता के साथ काम करना बीबीसी से ही सीखा है तो शायद ग़लत नहीं होगा.
लेकिन किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है पाठकों और दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरना और उनके बीच अपनी पहचान बनाए रखना. पिछले ३० वर्षों के दौरान प्रसारित विविध कार्यक्रमों ,विशेषकर विवेचना के करीब ६०० एपिसोड्स को श्रोताओं, दर्शकों और पाठकों से जो सराहना, स्नेह और सम्मान मिला है उसे शब्दों में व्यक्त कर पाना कठिन है. विवेचना के प्रसारित होते ही त्वरित गति से आपकी प्रतिक्रियाओं का मिलना, कभी भरपूर प्रशंसा तो कभी तीखी आलोचना, बारीक से बारीक बिंदु पर आपकी पैनी नज़र सच कहूँ तो विवेचना के हर नए अंक के बाद लगता था कि एक नए इम्तिहान में बैठ रहा हूँ.
बीबीसी के साथ विवेचना का सफ़र यहीं तक. बीबीसी और आप सभी का बहुत बहुत आभार. पर चलते चलते ये ज़रूर कहना चाहूँगा कि बीबीसी और विवेचना से ये विदाई क्षणिक विराम भर है, अंत नहीं. जल्द ही फिर मिलेंगे …

💡 मुख्य बिंदु:
लंबा सफर: रेहान फजल बीबीसी हिंदी के सबसे पुराने और विश्वसनीय चेहरों में से एक रहे हैं।
खास पहचान: इतिहास और अनसुने किस्सों पर उनकी पकड़ बेजोड़ मानी जाती है।
लोकप्रियता: उनके पॉडकास्ट और लेखों को दुनिया भर में लाखों लोग फॉलो करते हैं।
उनके जाने से बीबीसी हिंदी के एक बड़े अध्याय का समापन हुआ है। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक और पत्रकार बिरादरी उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।

अलविदा विवेचना…
बीबीसी के साथ ३० वर्ष के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान मैं कई खट्टे मीठे अनुभवों को जीते हुए पत्रकारिता की कड़ी चुनौतियों से गुज़रा हूँ. बीबीसी के साथ जुड़ना मेरे लिए गौरव की बात रही है. अगर मैं कहूँ कि मैंने काम की आज़ादी, निर्णय की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, तथ्यों की प्रामाणिकता, रोमांच और निडरता के साथ काम करना बीबीसी से ही सीखा है तो शायद ग़लत नहीं होगा.
लेकिन किसी भी पत्रकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है पाठकों और दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरना और उनके बीच अपनी पहचान बनाए रखना. पिछले ३० वर्षों के दौरान प्रसारित विविध कार्यक्रमों ,विशेषकर विवेचना के करीब ६०० एपिसोड्स को श्रोताओं, दर्शकों और पाठकों से जो सराहना, स्नेह और सम्मान मिला है उसे शब्दों में व्यक्त कर पाना कठिन है. विवेचना के प्रसारित होते ही त्वरित गति से आपकी प्रतिक्रियाओं का मिलना, कभी भरपूर प्रशंसा  तो कभी तीखी आलोचना, बारीक से बारीक बिंदु पर आपकी पैनी नज़र सच कहूँ तो विवेचना के हर नए अंक के बाद लगता था कि एक नए इम्तिहान में बैठ रहा हूँ.
बीबीसी के साथ विवेचना का सफ़र यहीं तक. बीबीसी और आप सभी का बहुत बहुत आभार. पर चलते चलते ये ज़रूर कहना चाहूँगा कि बीबीसी और विवेचना से ये विदाई क्षणिक विराम भर है, अंत नहीं . जल्द ही फिर मिलेंगे ….

Ad Ad