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टनकपुर के अविनाश ज्याल बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, माता-पिता के साथ ही पूरे क्षेत्र का किया नाम रोशन

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चम्पावत जिले के टनकपुर क्षेत्र स्थित ज्याल फार्म के निवासी अविनाश ज्याल ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। उन्होंने देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy – IMA) से सफल सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और लेफ्टिनेंट (Lieutenant) के रूप में कमीशन प्राप्त किया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है। अविनाश ज्याल की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह संदेश देती है कि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

अविनाश के मामा भगवान सिंह बोरा ने बताया कि अविनाश ज्याल के पिता सुभाष सिंह ज्याल एक व्यवसायी हैं, जबकि माता चंद्रा बोरा ज्याल एक कुशल गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट फ्रांसिस टनकपुर से प्राप्त की, जहां से उनके व्यक्तित्व और अनुशासन की नींव मजबूत हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय का रुख किया और वहां से इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी ( IT) में B.Tech की डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ उनमें देश सेवा की भावना भी लगातार मजबूत होती गई।

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अविनाश ज्याल की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है। बचपन से ही उन्हें सही दिशा, संस्कार और प्रेरणा अपने घर से मिलती रही।उनके मामा भगवान सिंह बोरा जो भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं वर्तमान में खटीमा में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और KIDZEE तथा Golden Bell Public School खटीमा के संचालक हैं। उन्होंने अपने भांजे अविनाश को न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि जीवन में अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रेरित किया।

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy – IMA) में 158वीं पासिंग आउट परेड अत्यंत भव्य और गौरवपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 515 जेंटलमैन कैडेट प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी बने। वहीं इस बार भारतीय सेनाओं को कुल 481 नए सैन्य अफसर प्राप्त हुए। इस विशेष पासिंग आउट परेड की समीक्षा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की। उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बेस्ट जेंटलमैन कैडेट को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस बार की परेड और भी खास रही क्योंकि इसमें पहली बार पास आउट होने वाली 9 महिला कैडेट भी शामिल रहीं, जिन्होंने भारतीय सेना में नए इतिहास की शुरुआत की।