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IMA ट्रेनिंग के दौरान हादसा: कैडेट निशांत धनखड़ शहीद, देश सेवा का सपना रह गया अधूरा

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देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान हरियाणा के झज्जर जिले के कासनी गांव निवासी कैडेट निशांत धनखड़ की मौत हो गई। सेना में लेफ्टिनेंट बनने का सपना देख रहे निशांत की शहादत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को उनकी पार्थिव देह गांव पहुंची, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

निशांत धनखड़ 10 जुलाई को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे। प्रशिक्षण के दौरान 9 अगस्त को दौड़ लगाते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए दिल्ली स्थित आर्मी आरआर अस्पताल ले जाया गया। बताया गया कि निशांत समेत तीन कैडेट्स की हालत गंभीर थी और चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। शनिवार शाम निशांत ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

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गांव पहुंची पार्थिव देह, हर आंख हुई नम

रविवार को निशांत की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव कासनी पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने होनहार बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि निशांत बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा की भावना से प्रेरित थे। निशांत का सेना में अधिकारी बनने का सपना लगभग पूरा होने वाला था, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान हुई इस दुखद घटना ने परिवार की खुशियां छीन लीं।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

निशांत के अंतिम संस्कार के दौरान सैन्य टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बादली विधायक कुलदीप वत्स ने भी पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। झज्जर प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार अंशुल ने पुष्पचक्र अर्पित किया। जिला सैनिक बोर्ड की ओर से सूबेदार राजेश ने भी श्रद्धांजलि दी।

अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक और आसपास के गांवों के लोग शामिल हुए। पूरे सैन्य सम्मान के साथ युवा कैडेट को अंतिम विदाई दी गई।

सैन्य पृष्ठभूमि वाला है निशांत का परिवार

निशांत धनखड़ का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि वाला है। परिवार के कई सदस्य भारतीय सेना और वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में भी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। निशांत की बहन अंशिता धनखड़ भी फ्लाइंग ऑफिसर हैं, जिनका चयन करीब दो वर्ष पहले हुआ था।

निशांत के दादा राम सिंह भारतीय सेना में सेवा दे चुके थे। उनके बड़े ताऊ दिवंगत नरेंद्र एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर रहे। परिवार के अन्य सदस्यों में ताऊ के बेटे कर्नल, बहू मेजर और बेटी फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर हैं। निशांत के चाचा सतेंद्र भी वारंट ऑफिसर हैं।

पिता के निधन के बाद परिवार को निशांत से थीं बड़ी उम्मीदें

निशांत के पिता का करीब तीन वर्ष पहले निधन हो गया था। वह डाक विभाग में पोस्टमैन के पद पर कार्यरत थे। पिता के निधन के बाद निशांत का सेना में अधिकारी के रूप में चयन परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि था। लेफ्टिनेंट बनने की खबर से परिवार और गांव में खुशी का माहौल था और सभी को उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद थी।

हालांकि, सैन्य प्रशिक्षण के दौरान हुई अचानक मौत ने परिवार और पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।

अधूरा रह गया देश सेवा का सपना

निशांत ने सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का सपना देखा था। वह इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कठिन सैन्य प्रशिक्षण ले रहे थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें बतौर लेफ्टिनेंट भारतीय सेना में सेवा देनी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कासनी गांव के लोगों ने निशांत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह युवाओं के लिए प्रेरणा थे। उनका असमय निधन परिवार के साथ-साथ पूरे गांव और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।