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चम्पावत : स्थानीय किसानों को मिला स्थायी बाजार, आईटीबीपी को भेजी गई ताजा सब्जियों की पहली सफल खेप

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उद्यान विभाग और आईटीबीपी की पहल से सीमांत किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

चम्पावत। सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में चम्पावत में एक महत्वपूर्ण पहल सफल होती दिखाई दे रही है। उद्यान विभाग और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए समझौते (एमओयू) के तहत स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित ताजी सब्जियों की पहली खेप सफलतापूर्वक आईटीबीपी को आपूर्ति कर दी गई है।

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यह पहल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘आदर्श चम्पावत’ विजन के तहत सीमांत क्षेत्रों के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समझौते के अनुसार आईटीबीपी की मांग के अनुरूप 25 प्रतिशत ताजी सब्जियों की आपूर्ति स्थानीय किसानों से सुनिश्चित की जा रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर और स्थायी बाजार मिल रहा है।

जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियों और फलों को सीधे आईटीबीपी तक पहुंचाना है। इसके लिए एक सुव्यवस्थित आपूर्ति प्रणाली विकसित की गई है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में मांग के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उत्पाद उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तो पड़ोसी और अन्य जनपदों के किसानों से समन्वय स्थापित कर स्थानीय उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। इससे आईटीबीपी की जरूरतें भी पूरी होती हैं और किसानों को विपणन की निरंतर सुविधा मिलती है।

जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार, इस योजना का प्रारंभिक चरण राज्य के चार सीमावर्ती जनपदों में शुरू किया गया था। अब इसे और व्यापक बनाने की तैयारी की जा रही है। आने वाले समय में चम्पावत जिले के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। इन समूहों को मांग के अनुरूप नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

इस पहल से एक ओर देश की सीमाओं पर तैनात आईटीबीपी के जवानों को ताजा और स्थानीय स्तर पर उत्पादित गुणवत्तापूर्ण फल एवं सब्जियां उपलब्ध होंगी, वहीं दूसरी ओर छोटे और सीमांत किसानों को अपने क्षेत्र में ही एक स्थायी एवं भरोसेमंद बाजार मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। कृषि और उद्यानिकी आधारित इस मॉडल को सीमांत क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।