लापरवाही की बलि! लोहाघाट में 14 फुट नीचे नदी में गिरने से युवा डेंटिस्ट की दर्दनाक मौत, एंबुलेंस भी हुई फेल
लोहाघाट/चम्पावत। लोहाघाट के बाड़ीगाड़ क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां नगर पालिका की घोर लापरवाही के कारण मायावती अस्पताल में कार्यरत एक युवा दंत चिकित्सक की जान चली गई। मृतक की पहचान डॉ. लोकेश जोशी (40 वर्ष), पुत्र स्वर्गीय सदानंद जोशी, निवासी पिथौरागढ़ के रूप में हुई है, जो यहां अपनी पत्नी और इकलौती बेटी के साथ किराए के मकान में रहते थे।

मिली जानकारी के अनुसार, कल रात लगभग 9:30 बजे डॉ. लोकेश जोशी स्कूटी से अपने घर पहुंचे। सड़क पर स्कूटी खड़ी करने के बाद वे अपने कमरे की तरफ जा रहे थे, तभी अचानक सड़क पर गहरा अंधेरा होने और सुरक्षा रेलिंग न होने की वजह से वे अनियंत्रित होकर लगभग 14 फुट नीचे बह रही बाड़ीगाड़ नदी में जा गिरे, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। काफी देर तक जब वे कमरे में नहीं पहुंचे, तो उनकी पत्नी डॉली जोशी ने बाहर आकर देखा। पति को बाड़ीगाड़ में गिरा देख उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को सूचित किया। स्थानीय लोगों ने भारी मशक्कत के बाद पानी में डूबे डॉक्टर को बाहर निकाला।
एंबुलेंस व्यवस्था की खुली पोल, चद्दर में बांधकर ले जाना पड़ा अस्पताल
इस हादसे ने क्षेत्र की स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। जानकारी के अनुसार घटना के बाद 108 और 112 को कॉल किया गया। मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस डॉक्टर को लेकर अस्पताल के लिए रवाना तो हुई, लेकिन मात्र 100 मीटर चलते ही एंबुलेंस बीच सड़क पर खराब हो गई। बेहद हैरान करने वाली बात यह रही कि एंबुलेंस में स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलेंडर तक मौजूद नहीं था। आखिरकार स्थानीय लोगों ने डॉक्टर को एक चद्दर में बांधा और किसी तरह लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।जनता में भारी आक्रोश, नगर पालिका को ठहराया जिम्मेदारइस दर्दनाक हादसे के बाद से स्थानीय निवासियों में नगर पालिका लोहाघाट और प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस सड़क किनारे सुरक्षा रेलिंग और स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग कर रहे थे। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पालिका ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जनता से सिर्फ टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा। इससे पहले भी इस क्षेत्र में रेलिंग न होने से कई हादसे हो चुके हैं। क्षेत्र की सड़क भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। स्थानीय जनता का साफ कहना है कि अगर यहाँ स्ट्रीट लाइट और रेलिंग होती, तो आज एक युवा डॉक्टर की जान बचाई जा सकती थी।

