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लोहाघाट अस्पताल को फिर लगा झटका: दो और विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादले, स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराया संकट

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लोहाघाट/चम्पावत। मॉडल जिला चम्पावत की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट से दो और विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले के आदेश जारी होने के बाद क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया है। निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) और छाती रोग विशेषज्ञ के स्थानांतरण से अस्पताल की विशेषज्ञ सेवाओं पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। लगातार हो रहे तबादलों ने जहां आम जनता की चिंता बढ़ा दी है, वहीं विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा भी मिल गया है।

निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) डॉ. चित्रलेखा बोरा एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र बोरा

शासन की ताजा तबादला सूची के अनुसार अस्पताल में कार्यरत निश्चेतक (एनेस्थेटिस्ट) डॉ. चित्रलेखा बोरा तथा छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र बोरा का अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया है। दोनों चिकित्सक उच्च शिक्षा (एमडी) पूरी करने के बाद पुनः लोहाघाट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके कार्यकाल में क्षेत्रीय मरीजों को विशेषज्ञ उपचार का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल रहा था। विशेष रूप से छाती रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता से फेफड़ों और श्वास संबंधी बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता था।

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इससे पहले अस्पताल से बाल रोग विशेषज्ञ और प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ का भी स्थानांतरण किया जा चुका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन चिकित्सकों के स्थान पर अब तक नए विशेषज्ञों की तैनाती नहीं की गई है, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि एक ओर सरकार चम्पावत को मॉडल जिला बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले से स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। लोगों ने शासन से तत्काल नए विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कर अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की मांग की है।

उधर, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सीमांत क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय अस्पतालों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से खाली किया जा रहा है।

हालांकि, जिलाधिकारी मनीष कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नई व्यवस्था होने तक किसी भी चिकित्सक को जिले से कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ने दिया जाएगा और जनता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।