पैतृक गांवों में स्थापित होंगी शहीद सैनिकों की मूर्तियां, नई पीढ़ी को प्रेरित करेंगी वीरगाथाएं
चम्पावत। उत्तराखंड के वीर शहीद सैनिकों के सम्मान और उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शहीद सैनिकों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
इस पहल का उद्देश्य देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और शौर्य को सम्मान देना तथा उनकी वीरगाथाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। पैतृक गांवों में स्थापित होने वाली मूर्तियां स्थानीय युवाओं और बच्चों को अपने क्षेत्र के वीर सपूतों के बलिदान से परिचित कराने का माध्यम बनेंगी। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का बलिदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। पैतृक गांवों में उनकी मूर्तियां स्थापित होने से उनकी स्मृतियां स्थायी रूप से संजोई जा सकेंगी और आने वाली पीढ़ियां अपने गांव के वीर सपूतों की शौर्यगाथा से प्रेरणा ले सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शहीद सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। साथ ही, इससे युवाओं में देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
चम्पावत के वीर सपूतों की स्मृतियां भी होंगी संजोई
इस पहल के तहत जनपद चम्पावत के वीर शहीद सैनिकों की स्मृतियों को भी सम्मानपूर्वक संजोया जाएगा। उनके पैतृक गांवों में स्थापित होने वाली मूर्तियां न केवल उनके बलिदान की याद दिलाएंगी, बल्कि स्थानीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेंगी। सरकार की इस पहल को उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और वीर सैनिकों के प्रति सम्मान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। वीर शहीदों की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती रहेंगी।

