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चम्पावत : जनपद के सभी देवदार एवं बांज के वृक्षों के संरक्षण के दिए कड़े निर्देश

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जनता को फाइलों में न उलझाएं, 2 दिवस में प्रकरणों का निस्तारण करें : जिलाधिकारी

चम्पावत। लोहाघाट क्षेत्र के भेड़खान में देवदार के पेड़ों को गर्डल (पेड़ को सुखाने के लिए मुख्य तने के चारों ओर की छाल को हटा देना) किए जाने के गंभीर प्रकरण पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। इस संबंध में जिला सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने जनपद में स्थित सभी देवदार एवं बांज के वृक्षों के संरक्षण हेतु सख्त निर्देश जारी किए।

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देवदार और बांज के हर पेड़ को बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। पेड़ों का संरक्षण केवल वन विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि सभी विभागों एवं समाज का कर्तव्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि वृक्ष संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी जाएं, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि पेड़ों को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। इसके साथ ही उन्होंने जनपद के सभी संबंधित पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अतिक्रमण चिन्हित कर तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

लोहाघाट में गर्डल किए गए पेड़ों का ट्रीटमेंट करते वनकर्मी।

जिलाधिकारी ने पटवारियों, ग्राम विकास अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के फील्ड अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह भी निर्देशित किया कि जनता को अनावश्यक रूप से फाइलों में न उलझाया जाए तथा सभी प्रकरणों का अधिकतम दो दिवस के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा, दोनों ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं और इन मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाना अनिवार्य है। इस दौरान सीडीओ डॉ. जीएस खाती, एडीएम कृष्णनाथ गोस्वामी, एसडीएम अनुराग आर्या, आकाश जोशी, नीतू डांगर सहित विभिन्न क्षेत्रों के पटवारी व विभिन्न विभागों के फील्ड अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

गर्डल किए पेड़ों का ट्रीटमेंट किया

चम्पावत। उप प्रभागीय वनाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि लोहाघाट के भेड़खान क्षेत्र में गर्डल किए गए देवदार के पेड़ों का नियमानुसार ट्रीटमेंट कर दिया गया है। वहीं प्रकरण में अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध H2 (POR) जारी किया गया है तथा मामले की विवेचना प्रचलित है।