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चम्पावत : नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के दोषी को सजा, पॉक्सो कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया

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चम्पावत। बनबसा क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में विशेष सत्र न्यायालय (पॉक्सो) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) एवं जिला जज अनुज कुमार संगल ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया।

अभियोजन के अनुसार, 5 सितंबर 2024 को बनबसा क्षेत्र की 14 वर्षीय छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान आरोपी रवि उर्फ गंठा ने उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़िता पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान एवं अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को चार धाराओं में दोषी पाया। साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। हालांकि, न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी को तीन अन्य धाराओं से दोषमुक्त कर दिया। दोषी रवि उर्फ गंठा (24) वर्तमान में मीना बाजार, बनबसा का निवासी है, जबकि उसका स्थायी पता ग्राम बिरिया, जलालाबाद, जनपद शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) बताया गया है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के.एस. राणा ने प्रभावी पैरवी की।

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आरोपी को 4 धाराओं में सजा, 3 गंभीर आरोपों से दोषमुक्ति

न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और पेश किए गए सबूतों का गहन अध्ययन करने के बाद आरोपी को चार अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई है, वहीं तीन अन्य धाराओं में पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। BNS की धारा 74 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना): इस अपराध के तहत अदालत ने दोषी को 2 वर्ष का साधारण कारावास एवं ₹5 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। BNS की धारा 75 (यौन उत्पीड़न): यौन उत्पीड़न के इस कृत्य के लिए दोषी को 2 वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। BNS की धारा 126 (2) (गलत तरीके से रोकना / सदोष अवरोध): किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता या रास्ते को बाधित करने के लिए 1 महीने का साधारण कारावास दिया गया है। POCSO की धारा 11/12 (बच्चे का यौन उत्पीड़न): नाबालिग के साथ हुए इस अपराध के तहत न्यायालय ने 2 वर्ष का साधारण कारावास एवं ₹5 हजार अर्थदंड निर्धारित किया है।

इन 3 धाराओं में मिली दोषमुक्ति …

BNS की धारा 351 (3) (अपराधिक धमकी): इस धारा के तहत लगाए गए आरोपों को न्यायालय ने सिद्ध नहीं माना और आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। BNS की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान): जानबूझकर अपमानित करने के इस आरोप से भी आरोपी को राहत मिली है। POCSO की धारा 7/8 (गंभीर यौन हमला): बच्चों के विरुद्ध होने वाले गंभीर यौन उत्पीड़न (सेक्सुअल असॉल्ट) के इस बेहद कड़े आरोप में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है।

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