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माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में दिखी चम्पावत की लोक संस्कृति की झलक

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स्कूली बच्चों ने निकाली भव्य झांकी, जिलाधिकारी ने बालेश्वर मंदिर में की पूजा-अर्चना; युवाओं और बच्चों को बांटी ‘मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन किट’

चम्पावत। माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव के पावन अवसर पर गुरुवार को जनपद मुख्यालय चम्पावत में स्कूली बच्चों ने भव्य झांकी निकालकर लोक संस्कृति और परंपराओं के रंग बिखेरे। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर झांकी में प्रतिभाग किया। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों और उत्साह ने लोगों का मन मोह लिया। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी।

महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा देवभूमि उत्तराखंड की आस्था, देव संस्कृति और जन-आकांक्षाओं की प्रतीक हैं। ऐसे पारंपरिक आयोजन पौराणिक संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। उन्होंने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत झांकी की भी सराहना की।

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कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा जनपद की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने झांकी का अवलोकन कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
युवाओं और बच्चों को अपनी लोक-संस्कृति से जोड़ने, उनमें रचनात्मक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ाने तथा उन्हें नशे से दूर रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बालेश्वर मंदिर समिति, स्थानीय युवाओं एवं बच्चों को ‘मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन किट’ भेंट की।

जिलाधिकारी ने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। स्कूली बच्चों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और लोक परंपराओं से जुड़ रही है। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि जिला प्रशासन जिले की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग करता रहेगा।

महोत्सव में विभिन्न गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों, आयोजन समिति के सदस्यों, युवाओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। झांकी के दौरान बच्चों की प्रस्तुतियों ने जनपद मुख्यालय को लोक संस्कृति और भक्ति के रंग में रंग दिया।