आदर्श चम्पावत @2030 की दिशा में बड़ा कदम: आंचल डेयरी की सप्लाई चेन पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
चम्पावत। जनपद में दुग्ध उत्पादन और डेयरी क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के वित्तपोषण और दून विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन मैनेजमेंट द्वारा संचालित “आदर्श चम्पावत @2030” परियोजना के तहत विशेषज्ञों ने आंचल डेयरी उत्पाद निर्माण इकाई का अध्ययन किया। इस दौरान दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और सप्लाई चेन को अधिक आधुनिक, लागत-कुशल और किसानों के लिए लाभकारी बनाने की रणनीति पर मंथन किया गया।
दून विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. सुधांशु जोशी तथा शोधार्थी तनुजा जोशी ने आंचल डेयरी के महाप्रबंधक जी. एस. राणा और दुग्धशाला प्रभारी सुरेन्द्र तरागी के साथ विस्तृत चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में आंचल डेयरी में प्रतिदिन 18 हजार लीटर से अधिक दूध का प्रसंस्करण किया जा रहा है और 266 दुग्ध सहकारी समितियां इससे जुड़ी हुई हैं। वहीं, चम्पावत विज़न-2030 के तहत प्रतिदिन 30 हजार लीटर से अधिक दूध संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नए मिल्क पार्लर स्थापित करने, दुग्ध संग्रहण केंद्रों के बेहतर प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था को अधिक दक्ष बनाने, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार और दुग्ध उत्पादों की बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप शोध आधारित और व्यवहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए।
डॉ. सुधांशु जोशी ने कहा कि चम्पावत जैसे पर्वतीय जिले में दुग्ध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। यदि आधुनिक लॉजिस्टिक्स, वैज्ञानिक सप्लाई चेन प्रबंधन, प्रभावी कोल्ड चेन और मजबूत विपणन नेटवर्क विकसित किया जाए तो स्थानीय दुग्ध उत्पादकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि “आदर्श चम्पावत @2030” परियोजना का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने जानकारी दी कि दून विश्वविद्यालय जल्द ही आंचल डेयरी की संपूर्ण सप्लाई चेन पर विस्तृत शोध अध्ययन करेगा। इसमें विशेष रूप से कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन (लागत अनुकूलन) और सप्लाई चेन नेटवर्क री-स्ट्रक्चरिंग (आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क के पुनर्गठन) पर कार्य किया जाएगा, ताकि दुग्ध संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, लागत प्रभावी और किसानों के हित में बनाया जा सके।
अध्ययन भ्रमण के दौरान परियोजना दल ने डेयरी की उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, दुग्ध संग्रहण और वितरण प्रणाली का भी अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय, सहकारी समितियों और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से चम्पावत की दुग्ध मूल्य श्रृंखला को राष्ट्रीय स्तर का आदर्श मॉडल बनाने पर जोर दिया।

