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उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक कांड, दो परीक्षाएं रद्द; प्रोफेसर बर्खास्त, 7 साल का प्रतिबंध

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उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में दो सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में एक निजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर पर व्हाट्सएप ग्रुप और ऑनलाइन माध्यम से प्रश्नपत्र साझा करने का आरोप सही पाए जाने के बाद दो परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। आरोपी प्रोफेसर को बर्खास्त कर सात वर्षों के लिए परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

देहरादून। उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय की दो सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही छात्रों तक पहुंचने का मामला सामने आया है। मामले के खुलासे के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि 8 जुलाई को आयोजित परीक्षा के बाद छात्रों ने शिकायत की थी कि प्रश्नपत्र पहले ही व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। शिकायत मिलने पर गठित जांच समिति ने जांच शुरू की, जिसमें एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

जांच में पता चला कि 24 जून को आयोजित एक अन्य सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पहले लीक हुआ था। दोनों प्रश्नपत्र कथित रूप से देहरादून स्थित शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने तैयार किए थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, डॉ. गुप्ता पर अपने कॉलेज के 22 छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप और एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप है। फिलहाल जांच में किसी आर्थिक लेन-देन का प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

पेपर लीक की पुष्टि होने पर ‘Machine Learning for Internet of Things’ और ‘Electromagnetic Field Theory’ विषयों की परीक्षाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गईं। इन परीक्षाओं के निरस्त होने से प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीके पटेल ने बताया कि दोनों विषयों की पुनर्परीक्षा अगस्त के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। नई परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।

कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने बताया कि आरोपी प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा संबंधी गतिविधि से प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

उधर, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक प्रो. टी.एस. सिद्धू ने बताया कि पहले संबंधित प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका इंक्रीमेंट रोका गया था। आंतरिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। उन्होंने कहा कि परीक्षा की गोपनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और निष्पक्ष जांच के बाद कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले से प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र प्रभावित हुए हैं, जिनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज (भीमताल), बीटीकेआईटी द्वाराहाट, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, टीएचडीसी इंस्टीट्यूट टिहरी, वूमेन्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर सहित अन्य संस्थान शामिल हैं।

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।