पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर चम्पावत में पेंशन उपवास, 13 सितंबर को देहरादून में घेराव का ऐलान
चम्पावत। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (एनएमओपीएस) की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर चम्पावत जिला कार्यकारिणी ने एनपीएस एवं यूपीएस के विरोध और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग को लेकर पेंशन उपवास कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया।
संगठन के जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह मेहता के नेतृत्व और जिला मंत्री प्रकाश तड़ागी के संचालन में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन केवल आर्थिक विषय नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य, सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन और बुढ़ापे की गरिमा से जुड़ा अधिकार है। सभा में निर्णय लिया गया कि 13 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में चम्पावत जिले से भी बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी शामिल होंगे।

जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह मेहता ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस न्यायोचित मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और निर्णायक बनाया जाएगा। उन्होंने जिले के सभी शिक्षक-कर्मचारियों से 13 सितंबर को देहरादून पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड के सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की। उन्होंने एनपीएस और यूपीएस को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मिनिस्ट्रियल फेडरेशन के महामंत्री जीवन ओली, पर्वतीय शिक्षक-कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष नागेंद्र जोशी, इंजीनियरिंग फेडरेशन के अध्यक्ष गोपाल कलाकोटी, राजकीय शिक्षक संघ के संयुक्त मंत्री नरेंद्र नाथ गोस्वामी, प्रवक्ता कुंवर प्रथोली, सतीश गहतोड़ी, गिरीश गहतोड़ी, नीरज पांडेय, प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री कीर्ति भट्ट, कैलाश फर्त्याल, कविंद्र तड़ागी, हरि विनोद पंत, किशोर पंगारिया, अमित टम्टा, राजेंद्र बिष्ट, रामप्रसाद कालाकोटी, नरेश जोशी, संजय कुमार, दिनेश जोशी, प्रदीप ढेक, कुंदन सिंह महर, शिवनाथ गोस्वामी, चिंतामणि कांपड़ी सहित अनेक शिक्षक-कर्मचारियों ने विचार रखे।


