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5 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर उत्तराखंड के फार्मासिस्ट, 1 सितंबर से काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध

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चम्पावत। फार्मेसी संवर्ग की लंबे समय से लंबित पांच सूत्रीय मांगों के निस्तारण को लेकर उत्तराखंड के फार्मासिस्ट अब आंदोलन की राह पर हैं। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड की जनपद शाखा चम्पावत ने प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य सचिव और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र भेजकर मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन स्तर से मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के फार्मासिस्ट चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।

जिलाध्यक्ष विष्णु गिरी गोस्वामी और जिला मंत्री रोशन लाल विश्वकर्मा ने संयुक्त बयान में कहा है कि फार्मासिस्टों की न्यायसंगत मांगों की लगातार अनदेखी से कर्मचारियों में असंतोष और निराशा बढ़ रही है।

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ये हैं फार्मासिस्टों की पांच प्रमुख मांगें

1. 10 वर्ष की सेवा पर प्रथम पदोन्नति पद का वेतनमान:
एसोसिएशन ने वर्ष 2009 के बाद नियुक्त फार्मासिस्टों को 10 वर्ष की सेवा पूरी करने पर प्रथम ACP के रूप में प्रथम पदोन्नति पद का वेतनमान देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि फार्मासिस्टों के पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारी 34-35 वर्ष की सेवा के बाद भी प्रारंभिक पद से ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। साथ ही 14 दिसंबर 2023 के शासनादेश से जुड़ी नॉन-फंक्शनल वेतनमान की विसंगति दूर करने की मांग की गई है।

2. स्वास्थ्य उपकेंद्रों के 391 स्थगित पद बहाल किए जाएं:
एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2005-06 में पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 536 फार्मासिस्ट पद सृजित किए गए थे। दिसंबर 2021 में इनमें से 119 पद मेडिकल कॉलेजों को आवंटित कर दिए गए, जबकि 391 पद स्थगित कर दिए गए। संगठन ने इन 391 पदों को पुनः क्रियाशील करने के लिए प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की मांग की है।

3. फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 लागू हो:
फार्मासिस्टों ने फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 के अनुरूप शासनादेश जारी करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे दवाओं के अतार्किक प्रयोग, ड्रग रेजिस्टेंस और ओवरडोज से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही मरीजों की दवा संबंधी काउंसलिंग के लिए प्रत्येक चिकित्सालय में अलग काउंसलिंग कक्ष बनाने की मांग भी की गई है।

4. डॉक्टर की अनुपस्थिति में सूचीबद्ध दवाएं देने का अधिकार:
एसोसिएशन ने ओडिशा और असम की तर्ज पर उत्तराखंड में भी अति-दुर्गम एवं ग्रामीण क्षेत्रों तथा चारधाम यात्रा मार्गों पर डॉक्टर की अनुपस्थिति में फार्मासिस्टों को सूचीबद्ध बीमारियों के उपचार के लिए निर्धारित दवाएं देने का कानूनी अधिकार देने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि दुर्गम क्षेत्रों में कई बार डॉक्टर की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट ही स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालते हैं।

5. चारधाम यात्रा ड्यूटी के बकाया भुगतान और सुविधाओं में सुधार:
फार्मासिस्टों ने चारधाम यात्रा और विभिन्न मेला-यात्रा ड्यूटी के दौरान लंबित TA/DA का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। साथ ही यात्रा मार्गों पर कर्मचारियों के लिए उचित आवास और भोजन की व्यवस्था तथा प्रोत्साहन भत्ते की दरों की समीक्षा किए जाने की मांग रखी गई है।

1 सितंबर से काली पट्टी बांधकर विरोध

एसोसिएशन ने मांगों के समर्थन में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक संगठन के पदाधिकारी और सदस्य विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा महासंघ के पदाधिकारियों को समर्थन के लिए पत्र भेजेंगे।

इसके बाद 1 सितंबर से 15 सितंबर 2026 तक प्रदेशभर के फार्मासिस्ट कार्यस्थलों पर काली पट्टी (ब्लैक बैज) बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि प्रथम चरण के आंदोलन के बाद भी यदि शासन की ओर से मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो समीक्षा बैठक आयोजित कर आंदोलन के द्वितीय और अधिक उग्र चरण की घोषणा की जाएगी। संगठन ने इसके लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी है।