पांच सूत्रीय मांगों को लेकर फार्मासिस्टों का आंदोलन शुरू, चम्पावत में काला फीता बांधकर जताया विरोध
लंबित मांगों के निस्तारण को लेकर 1 से 15 सितंबर तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन, समाधान नहीं हुआ तो चरणबद्ध आंदोलन होगा तेज
चम्पावत। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रांतीय आह्वान पर मंगलवार, 1 सितंबर से जनपद चंपावत के सभी स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सालयों में कार्यरत फार्मेसी अधिकारियों ने अपनी पांच सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। फार्मेसी अधिकारियों ने बांह पर काला फीता बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष विष्णु गिरी गोस्वामी और जिला मंत्री रोशन लाल कर रहे हैं। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, मांगों के निस्तारण के लिए 17 अगस्त को शासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया था, लेकिन सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रांतीय अध्यक्ष सुधा कुकरेती और प्रांतीय महामंत्री डॉ. सतीश चंद्र पांडेय के निर्देश पर आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।

ये हैं फार्मासिस्टों की पांच प्रमुख मांगें
- 10 वर्ष की सेवा पर एसीपी का लाभ और वेतनमान संबंधी विसंगतियों का समाधान।
- 391 स्थगित फार्मासिस्ट पदों की पुनर्बहाली कर नियुक्तियां सुनिश्चित करना।
- फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 लागू कर अस्पतालों में काउंसलिंग कक्ष खोलना।
- उड़ीसा और असम की तर्ज पर सीमित उपचार का अधिकार फार्मेसी अधिकारियों को देना।
- चारधाम यात्रा व मेला ड्यूटी के लंबित भुगतान के साथ आवास, भोजन और प्रोत्साहन भत्ते की व्यवस्था में सुधार।



तीन चरणों में चलेगा आंदोलन
प्रांतीय नेतृत्व की ओर से जारी आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार प्रदर्शन तीन चरणों में होगा।
पहला चरण—1 से 15 सितंबर: सभी सदस्य बांह पर काला फीता बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मांगों के संबंध में पत्र भेजे जाएंगे।
दूसरा चरण—16 से 26 सितंबर: काला फीता बांधने के साथ प्रतिदिन दोपहर दो बजे के बाद कार्यस्थलों पर क्रमवार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
तीसरा चरण—26 सितंबर के बाद: यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन समीक्षा बैठक कर महानिदेशालय में क्रमिक धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा।
जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में दिखा असर
आंदोलन के पहले दिन जिला चिकित्सालय चम्पावत, उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट और टनकपुर, पीएचसी बाराकोट व पाटी, एपीएचसी धौन, पिंचिस, स्वांला, खेतीखान, सिप्टी, इजड़ा, रेगड़ू, चौमेल, पुल्ला, रीठा साहिब और देवीधुरा समेत जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मेसी अधिकारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराया।
विरोध प्रदर्शन में जगदीश कुंवर, प्रकाश भट्ट, महेश भट्ट, अनिल गड़कोटी, जगदीश राणा, प्रीतम लाल, मनोज पुनेठा, भूपेश जोशी, मनोज कुमार टम्टा, प्रेम राम टम्टा, तान सिंह, अनीता अधिकारी, प्रमोद कुमार, गिरीश चंद्र खर्कवाल, संजय वर्मा, दीपा धामी, सुनील गोस्वामी, मुकुल राय, मनोज आर्या, नवीन कनौजिया, योगेश कनौजिया, शेखर सिंह, राजू वर्मा, मृत्युंजय वर्मा, दिनेश कुमार, कुलदीप राय, सुरेश चंद्र पाटनी, सुनीता पाटनी, नवीन गोस्वामी, संजय विश्वकर्मा, दिलीप राणा, अनिल वर्मा, प्रकाश खड़ायत, दीपक गिरी, हरीश रावत, निर्मला ओली, विजय श्री गहतोड़ी, ज्योति गहतोड़ी, किरन जोशी और सुरेश जोशी सहित जिलेभर के फार्मेसी अधिकारी शामिल रहे।

