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पाटी में 10 लाख की फूड वैन से चमकी महिलाओं की आर्थिकी

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रौलमेल के सरस्वती स्वयं सहायता समूह ने ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से शुरू किया कारोबार, महिलाओं के साथ पुरुषों की भी भागीदारी

चम्पावत। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल सामने आई है। विकासखंड पाटी के रौलमेल क्षेत्र में सरस्वती स्वयं सहायता समूह ने ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से करीब 10 लाख रुपये की लागत से आधुनिक फूड वैन कारोबार शुरू किया है। महिलाओं और पुरुषों के संयुक्त प्रयासों से संचालित यह उद्यम ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रहा है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। इसी क्रम में ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से सरस्वती स्वयं सहायता समूह ने इस उद्यम की शुरुआत की है। कारोबार में समूह की महिलाओं के साथ स्थानीय पुरुष भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

छह लाख रुपये का परियोजना सहयोग

फूड वैन उद्यम की कुल लागत करीब 10 लाख रुपये है। इसमें ग्रामोत्थान परियोजना की ओर से छह लाख रुपये का सहयोग दिया गया है। इसके अलावा तीन लाख रुपये का बैंक ऋण लिया गया, जबकि एक लाख रुपये का अंशदान स्वयं सहायता समूह ने स्वयं किया है। इस वित्तीय सहयोग और सामूहिक प्रयासों से फूड वैन तैयार कर उसका संचालन शुरू किया गया है।
ंमोबाइल फूड वैन क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर लोगों को स्वादिष्ट फास्ट फूड उपलब्ध करा रही है। स्थानीय स्तर पर लोगों को पसंदीदा व्यंजन उपलब्ध होने के साथ ही समूह से जुड़ी महिलाओं और उनके परिवारों के लिए आय का नया स्रोत भी तैयार हुआ है।

स्वरोजगार से मजबूत हो रही ग्रामीण आर्थिकी

इस पहल से महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का अवसर मिला है। वहीं, पुरुषों की सक्रिय सहभागिता ने उद्यम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकारी योजनाओं के सहयोग, बैंक ऋण और समूह के अपने अंशदान से शुरू हुआ यह कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों से स्वरोजगार स्थापित करने की संभावनाओं को भी दर्शाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने की प्राथमिकता के बीच रौलमेल का यह उद्यम महिला सशक्तीकरण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में सामने आया है।