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नाबालिग को भगाने और दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा

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चम्पावत सत्र न्यायालय ने हाशिम पर लगाया 55 हजार रुपये का जुर्माना, पीड़िता को 1.50 लाख रुपये देने के भी आदेश

चम्पावत। नाबालिग किशोरी को भगाने और दुष्कर्म के मामले में चम्पावत के सत्र न्यायालय ने एक अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने 31 अक्टूबर को दोषी हाशिम (20) पर कुल 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, दूसरे अभियुक्त अरमान के खिलाफ विशेष सत्र परीक्षण की कार्यवाही उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दी गई है।

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मामला टनकपुर क्षेत्र का है। 21 मार्च 2024 को 16 वर्षीय किशोरी को भगाने की घटना सामने आई थी। नाबालिग के परिजनों की तहरीर पर टनकपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65, 87, 137(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, साक्ष्य, दस्तावेज और दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद सत्र न्यायालय ने हाशिम को दोषी करार दिया। अदालत ने तीन धाराओं में सजा सुनाते हुए कुल 55 हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया।

तीन धाराओं में सुनाई सजा

BNS की धारा 137(2) के तहत तीन वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। BNS की धारा 87 के तहत पांच वर्ष का साधारण कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(1) के तहत 10 वर्ष का साधारण कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अदालत ने अर्थदंड की राशि में से 50 हजार रुपये पीड़िता को उसके बैंक खाते के माध्यम से अदा करने के आदेश दिए। इसके साथ ही राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपये की प्रतिकर राशि देने के निर्देश भी दिए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केएस राणा ने पैरवी की।