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80 साल बाद सामने आई सुई के वीर सपूत रामदत्त चौबे की शहादत की कहानी, 19 वर्ष की उम्र में बर्मा मोर्चे पर हुए थे शहीद

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सेना के आधिकारिक दस्तावेजों से सामने आया इतिहास, 17 वर्ष की उम्र में हुए थे भर्ती; रंगून मेमोरियल की फेस-43 पर आज भी अंकित है नाम

लोहाघाट/चम्पावत। उत्तराखंड के काली कुमाऊं, चम्पावत और लोहाघाट की पावन धरती सदियों से वीर सपूतों और राष्ट्रभक्ति की जननी रही है। इसी गौरवशाली परंपरा में सुई क्षेत्र के एक और वीर सपूत का नाम सामने आया है। सुई निवासी अमर शहीद सिपाही रामदत्त चौबे, पुत्र स्वर्गीय भवानी दत्त चौबे, ने महज 19 वर्ष की उम्र में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के मोर्चे पर अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। करीब 80 वर्ष तक इतिहास के पन्नों में दबा उनकी शहादत का यह गौरवशाली अध्याय हाल में भारतीय सेना के कुमाऊं रेजीमेंट रिकॉर्ड से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और पत्रों के माध्यम से सामने आया है।

शहीद रामदत्त चौबे की सैन्य पहचान सिपाही राम दत्त चौबे, सेवा संख्या 32977 के रूप में दर्ज है। उपलब्ध सैन्य रिकॉर्ड के अनुसार वह मात्र 17 वर्ष की उम्र में 16 अप्रैल 1943 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा के बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण युद्ध क्षेत्र में सेवा दी। सेना के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 4 मार्च 1945 को बर्मा मोर्चे पर लड़ते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

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तीन प्रतिष्ठित युद्ध पदकों से हुए सम्मानित

परिजनों के अनुसार रामदत्त चौबे के अदम्य साहस और युद्ध में दिए गए सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत 1939-45 स्टार, बर्मा स्टार और वार मेडल से सम्मानित किया गया। इन पदकों से यह भी स्पष्ट होता है कि युवा रामदत्त ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा अभियान में सक्रिय रूप से सेवा की थी।

शहीद रामदत्त का नाम म्यांमार के यांगून स्थित ऐतिहासिक रंगून मेमोरियल की फेस-43 पर भी अंकित है। राष्ट्रमंडल युद्ध समाधि आयोग (CWGC) के रिकॉर्ड में उनका विवरण 32977, Sepoy Ram Datt, 8th Battalion, 12th Frontier Force Regiment के रूप में दर्ज है। रिकॉर्ड में उनके माता-पिता का नाम भवानी दत्त और भिमाली देवी तथा पता Chaubey Gaon, Almora, India दर्ज है। उस समय चम्पावत अलग जिला नहीं था, इसलिए वर्तमान चम्पावत क्षेत्र के गांव पुराने सैन्य अभिलेखों में अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत दर्ज मिलते हैं।

सुई क्षेत्र के लोगों के लिए गौरव का क्षण

शहीद रामदत्त चौबे की शहादत का इतिहास सामने आने के बाद सुई, लोहाघाट और पूरे काली कुमाऊं क्षेत्र में गर्व और श्रद्धा का माहौल है। खिलानंद चौबे और शिक्षक श्याम दत्त चौबे ने बताया कि करीब आठ दशक बाद क्षेत्र के इस वीर सपूत की शहादत से जुड़ी जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से सामने आना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है।

उन्होंने कहा कि रामदत्त चौबे ने जिस उम्र में जीवन की शुरुआत ही की थी, उसी उम्र में राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की प्रेरणा बना रहेगा।

गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज का नाम शहीद के नाम पर रखने की मांग

शहीद के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने उनकी स्मृति को स्थायी रूप से जीवंत रखने के लिए निर्माणाधीन गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज, छमनियां का नाम शहीद रामदत्त चौबे के नाम पर रखने की मांग की है। प्रस्तावित नाम “अमर शहीद सिपाही रामदत्त चौबे गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज” रखने का सुझाव दिया गया है।

परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के इस वीर सपूत की स्मृति में किसी प्रमुख शिक्षण अथवा खेल संस्थान का नामकरण किया जाना उनके बलिदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके साथ ही क्षेत्र में शहीद की स्मृति में भव्य स्मारक अथवा प्रवेश द्वार बनाए जाने की भी मांग उठाई गई है।

द्योलागढ़ के आसपास स्मारक के लिए स्थान तलाशने का प्रयास

शिक्षक श्याम दत्त चौबे ने कहा कि खिलानंद चौबे का प्रयास खोजपूर्ण और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक शहादत को सामने लाने का प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि ग्राम सभावासियों तथा सामाजिक उत्थान एवं शैक्षिक-सांस्कृतिक समिति की ओर से शहीद रामदत्त चौबे की स्मृति में भव्य स्मारक बनाने के लिए द्योलागढ़ के आसपास स्थान चिह्नित करने का प्रयास किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुई की धरती के इस युवा वीर ने करीब आठ दशक पहले देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। अब समय आ गया है कि उनकी शहादत को इतिहास के पन्नों से निकालकर क्षेत्र की सामूहिक स्मृति और नई पीढ़ी की प्रेरणा का हिस्सा बनाया जाए।