समय पर मिली मदद ने बचाया 16 वर्षीय रवीना का हाथ
गंभीर हालत में लोहाघाट अस्पताल पहुंची थी रवीना, एक माह तक झाड़-फूंक के चलते बिगड़ती गई स्थिति; सचिन जोशी की पहल और डॉक्टर राजीव चौहान के उपचार से मिली नई उम्मीद
लोहाघाट/चम्पावत। बाराकोट के तड़ीगांव की 16 वर्षीय रवीना के लिए समय पर मिली मदद जिंदगी बदलने वाली साबित हुई। करीब एक महीने तक बीमारी के इलाज के बजाय झाड़-फूंक में उलझे रहने के कारण रवीना के हाथ की स्थिति गंभीर हो गई थी। हाथ में अत्यधिक सूजन के साथ उसकी उंगलियां बेहद ठंडी पड़ चुकी थीं। ऐसे में अस्पताल से लौट रही रवीना को पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी ने दोबारा अस्पताल पहुंचाया, जहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौहान और चिकित्सकीय टीम ने उपचार शुरू किया। चार दिन बाद रवीना के चेहरे पर मुस्कान लौटी और उसका हाथ बचाने में सफलता मिली।

रवीना के सिर से पहले ही मां-बाप का साया उठ चुका है और वह अपनी नानी के साथ रह रही है। बीमारी के बाद करीब एक माह पहले उसे उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट लाया गया था, लेकिन इसके बाद उसका नियमित उपचार नहीं हो सका। इस दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
गंभीर स्थिति में जब रवीना को दोबारा उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट लाया गया तो हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौहान ने उसकी हालत को गंभीर बताया। हाथ में काफी सूजन थी और उंगलियां अत्यधिक ठंडी पड़ चुकी थीं। डॉक्टर ने समय पर उपचार नहीं होने पर हाथ को बचाने में मुश्किल आने की आशंका जताते हुए तत्काल इलाज की जरूरत बताई।
अस्पताल से लौट रही थी रवीना, सचिन जोशी ने नहीं मानी हार
डॉक्टर की गंभीर चेतावनी सुनकर रवीना और उसकी नानी घबरा गईं और अस्पताल से वापस जाने लगीं। इसी दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें रोककर स्थिति समझाई। उन्होंने रवीना और उसकी नानी को हिम्मत दी और बच्ची को दोबारा अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद सचिन जोशी ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी और चिकित्सक डॉ. विराज राठी से संपर्क कर रवीना के उपचार में सहयोग का आग्रह किया। जिलाधिकारी की ओर से भी हरसंभव मदद का भरोसा दिया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने रवीना का उपचार शुरू किया।
चार दिन के उपचार के बाद चेहरे पर लौटी मुस्कान
रवीना की हालत गंभीर होने के कारण उपचार चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद डॉ. राजीव चौहान और चिकित्सकीय टीम ने लगातार उपचार किया। सचिन जोशी भी इस दौरान रवीना और उसके परिवार के साथ खड़े रहे।
करीब चार दिन के उपचार के बाद रवीना की हालत में सुधार हुआ और वह अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौट गई। अस्पताल से बाहर निकलते समय उसके चेहरे पर मुस्कान थी, जबकि नानी की आंखों में राहत दिखाई दी।
जिस हाथ को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही थी, उपचार के बाद उसे बचाने में सफलता मिली। रवीना के स्वस्थ होकर घर लौटने पर परिवार के साथ चिकित्सकों और मददगारों ने भी राहत की सांस ली।
जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए पहले भी आगे आते रहे हैं सचिन
रवीना के मामले में सचिन जोशी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वह इससे पहले भी जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। कई मरीजों को उन्होंने अपने निजी खर्च पर हल्द्वानी, बरेली सहित अन्य शहरों के अस्पतालों तक अपनी गाड़ी से पहुंचाकर उपचार में सहयोग किया है। रवीना के मामले में भी अस्पताल से वापस लौट रही बच्ची को दोबारा उपचार के लिए पहुंचाने का उनका प्रयास निर्णायक साबित हुआ। वहीं डॉ. राजीव चौहान और चिकित्सकीय टीम ने गंभीर स्थिति में उपचार की जिम्मेदारी संभाली।
रवीना की कहानी समय पर उपचार, संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर सामने आई है। एक तरफ सचिन जोशी ने बच्ची को अस्पताल से वापस नहीं जाने दिया, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों ने उपचार के जरिए उसके हाथ को बचाने का प्रयास किया। चार दिन बाद रवीना के चेहरे पर लौटी मुस्कान ने इस पूरे प्रयास को एक सुखद अंत दिया।

