आधुनिक बागवानी से समृद्ध हो रहे चम्पावत के किसान, जीवन खर्कवाल बने मिसाल
इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय के साथ आधुनिक सेब, कीवी और सब्जी उत्पादन में बनाई पहचान, पॉलीहाउस और जैविक खेती से बढ़ाई आमदनी
लोहाघाट/चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदेश में आधुनिक कृषि एवं उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत पौध सामग्री और विभागीय योजनाओं से जोड़कर उनकी आय एवं आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर अब धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
इसी क्रम में चम्पावत जिले के विकासखंड लोहाघाट के ग्राम खैसकांडे निवासी प्रगतिशील कृषक जीवन खर्कवाल आधुनिक बागवानी के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरे हैं। पेशे से इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी होने के बावजूद खेती और बागवानी के प्रति उनका लगाव उन्हें अलग पहचान दिलाता है। पिता रमेश चंद्र खर्कवाल से मिले कृषि संस्कारों और उद्यान विभाग के मार्गदर्शन को अपनाते हुए जीवन खर्कवाल आधुनिक तकनीकों के जरिए खेती-बागवानी को अपनी आजीविका का सशक्त माध्यम बना रहे हैं।




300 सेब पौधों से शुरू किया व्यवस्थित बगीचा
उद्यान विभाग के उद्यान सचल दल केंद्र, लोहाघाट के सहयोग से जीवन खर्कवाल ने M-9 रूटस्टॉक पर करीब 300 सेब पौधों का व्यवस्थित बगीचा स्थापित किया है। इसके अलावा वर्ष 2022-23 में M-111 रूटस्टॉक पर जेरोमाइन, रेड डिलीशियस, गाला और रेड गाला जैसी उन्नत किस्मों के 533 सेब पौधे लगाए गए। वर्तमान में वे करीब 15 नाली क्षेत्र में M-9 सेब का नया उच्च घनत्व वाला बगीचा तैयार कर रहे हैं। उच्च घनत्व वाली बागवानी के जरिए सीमित भूमि में अधिक पौधों का वैज्ञानिक ढंग से रोपण कर बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
कीवी से लेकर पॉलीहाउस तक, खेती में अपनाया विविधीकरण
जीवन खर्कवाल ने कृषि में विविधीकरण को अपनाते हुए राज्य सरकार की कीवी मिशन योजना के तहत 131 कीवी पौधे भी लगाए हैं। इन पौधों में अब अच्छी फलन शुरू हो चुकी है और उत्पादित कीवी को स्थानीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसके साथ ही उनके बगीचे में प्लम, खुबानी सहित अन्य फलदार वृक्षों का उत्पादन भी हो रहा है। वहीं आलू की खेती से भी उन्हें उत्पादन प्राप्त हो रहा है। आधुनिक खेती को विस्तार देते हुए उन्होंने करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्र में तीन पॉलीहाउस स्थापित किए हैं, जिनमें मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बिक्री की जा रही है।
वर्मी कम्पोस्ट से जैविक खेती को बढ़ावा
जीवन खर्कवाल खेती में जैविक तौर-तरीकों को भी महत्व दे रहे हैं। इसके लिए उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित की है और इससे तैयार जैविक खाद का उपयोग अपने खेतों एवं बगीचों में किया जा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
परिवार की सीख और आधुनिक तकनीक का बेहतर संयोजन
जीवन खर्कवाल की सफलता के पीछे उनके पिता से मिले कृषि संस्कार, परिवार का सहयोग और आधुनिक तकनीक का बेहतर संयोजन है। फल उत्पादन, उच्च घनत्व वाली सेब बागवानी, कीवी उत्पादन, पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन और जैविक खेती को एक साथ अपनाकर उन्होंने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक एवं विभागीय योजनाओं का सही उपयोग कर खेती-बागवानी को मजबूत आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘समृद्ध किसान, सशक्त उत्तराखंड’ के संकल्प की दिशा में जीवन खर्कवाल जैसे प्रगतिशील किसान अन्य युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। उनका प्रयास पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक उद्यानिकी और कृषि विविधीकरण की संभावनाओं को भी सामने ला रहा है।

