उत्तराखंड: 53 असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं स्थायी, चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने दी मंजूरी
देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पिछले दो वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे 53 नियमित संकाय सदस्यों (असिस्टेंट प्रोफेसरों) के स्थायीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में अपनी आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी है।
इन मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक होंगे लाभान्वित
सरकारी आदेश के अनुसार, जिन 53 असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं स्थायी की गई हैं, वे राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून: 14 शिक्षक
राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर: 10 शिक्षक
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी: 19 शिक्षक
राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा: 09 शिक्षक
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार: 01 शिक्षक
दो वर्ष की सेवा पूरी करने पर मिला लाभ
यह निर्णय उन शिक्षकों के लिए लिया गया है जिन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपनी 02 वर्ष की अर्हकारी सेवा या परिवीक्षा अवधि (Probation period) सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। विभाग द्वारा उनके स्थायीकरण की संस्तुति की गई थी, जिसे अब शासन से हरी झंडी मिल गई है।
चिकित्सा सेवाओं में आएगी मजबूती
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इस कदम को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से मेडिकल कॉलेजों के विभागीय बुनियादी ढांचे को स्थिरता मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में प्राथमिक व मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना है। शिक्षकों का स्थायीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्रदेश की चिकित्सा सेवा में लगे चिकित्सकों को उनका वाजिब लाभ मिल सकेगा। इस फैसले से चिकित्सा जगत में हर्ष का माहौल है और माना जा रहा है कि इससे मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक कार्यों और मरीजों के उपचार की गुणवत्ता में और सुधार होगा।


